उत्तराखंड में जनरल एमसी बधानी को उपनल चेयरमैन के पद हटा दिया गया है। मुख्य सचिव सुभाष कुमार की ओर से जारी आदेश में जनरल बधानी को पद मुक्त करते हुए अग्रिम आदेशों तक प्रमुख सचिव सैनिक कल्याण को कार्यभार सौंपा है।
हरक सिंह रावत से तालमेल नहीं
बधानी के पास उपनल के अलावा राज्य आपदा सलाहकार समिति अध्यक्ष भी हैं, जिसपर वह बने रहेंगे। माना जा रहा है कि उनकी सेवाएं राज्य आपदा पुनर्निर्माण कार्यों में बढ़ाई जाएंगी। गौरतलब है कि उपनल के माध्यम से आउटसोर्सिंग पर नियुक्तियों पर बधानी सवाल खड़े करते रहे हैं। यहां तक कि सैनिक कल्याण मंत्री हरक सिंह रावत से उनका तालमेल नहीं बैठ पाने की बात उठती रही हैं।
सेना से इंजीनियर इन चीफ पद से रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल बधानी की सेवाएं सरकार आपदा पुनर्निर्माण एवं पुनवार्स में सीमित कर उपनल का प्रभार वापस ले लिया है।
बीते वर्ष कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के उपनल चेयरमैन बनने से लाभ के पद का विवाद उठ खड़ा हुआ था जिसके बाद सरकार ने जनरल बधानी को निगम का चेयरमैन नामित किया, जबकि वह राज्य आपदा सलाहकार समिति के अध्यक्ष पहले से थे।
लंबे समय तक शासन में विवाद
उपनल की तैनाती के बाद जनरल बधानी को वेतन भत्ते देने को लेकर लंबे समय तक शासन में विवाद चलता रहा। फरवरी 2014 में बधानी ने श्रीनगर मेडिकल कालेज में रोक के बावजूद उपनल की पुरानी ज्वाइनिंग स्लिप पर 33 पदों पर संविदा कर्मियों को नियुक्ति करने की कोशिश पर जांच बैठाने के लिए सीएम को लिखा।
सैनिक कल्याण मंत्री हरक सिंह के निर्देश पर श्रीनगर मेडिकल कालेज में भर्तियों के मामले के विरोध में बधानी मुखर रहे हैं। सैनिक कल्याण मंत्री हरक सिंह ने इन पदों को भरने के लिए सीएम से अनुमोदन मांगा था।
फिलहाल सरकार ने आपदा पुनर्निर्माण कार्यों में जनरल की विशेषज्ञता का लाभ लेने की बात का हवाला देकर जनरल बधानी का कार्यभार समिति में बढ़ाने की तैयारी की है। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के करीबी माने जाने वाले जनरल बधानी की उपनल चेयरमैन ताजपोशी के बाद कई कांग्रेसी उन्हें दो पद दिए जाने का विरोध करते रहे हैं। उनको हटाये जाने के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री बहुगुणा की सहमति सरकार ने ली है।