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गौरीकुंड तप्तकुंड का मूल स्रोत अपने स्थान से करीब डेढ़ सौ मीटर आगे खिसका 

Mon, 16 Jul 2018 12:16 PM IST
विनय बहुगुणा, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
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आपदा में पूरी तरह ध्वस्त हो गया था स्रोत
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बाबा केदार की यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव गौरीकुंड स्थित तप्तकुंड का मूल स्रोत अपने स्थान से करीब डेढ़ सौ मीटर आगे खिसक गया है। आपदा में पूरी तरह ध्वस्त हुए स्रोत पर पूर्व की भांति अब भी पर्याप्त पानी है। तप्त कुंड को अपने पुराने स्वरूप में वापस लाने के लिए गढ़वाल मंडल विकास निगम आगे आया है।

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तप्तकुंड के पुनरोद्धार कार्य में जुटे गढ़वाल मंडल विकास निगम के मजदूरों ने करीब एक माह पहले भूजल आयोग की टीम की मौजूदगी में यहां गरम पानी का स्रोत खोजने के लिए खुदाई की थी, तो मुख्य स्रोत मंदाकिनी नदी के किनारे पर मिला। यह स्रोत अपने मूल स्थान से करीब 150 मीटर आगे खिसक चुका है। इसके पानी की गर्माहट 25 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच है, जबकि तीव्रता आपदा से पहले जैसी है। जीएमवीएन अधिकारियों के अनुसार विशेषज्ञों की मौजूदगी में तप्तकुंड को संरक्षित करने के लिए आधुनिक तकनीक के माध्यम से कार्य किया जाएगा। तप्तकुंड की सुरक्षा के लिए चारों तरफ सुरक्षा दीवार भी बनाई जाएगी।  

विदित हो कि 16/17 जून 2013 की केदारनाथ आपदा में गौरीकुंड व्यापक रूप से प्रभावित हुआ था। तब, यहां गौरी माई मंदिर के समीप स्थित तप्तकुंड भी तबाह हो गया था। गरम पानी का रिसाव मंदाकिनी नदी के किनारे होने लगा था। स्थानीय लोगों द्वारा प्लास्टिक के पाइप से इसे संरक्षित किया गया, लेकिन शासन-प्रशासन ने इसकी कोई सुध नहीं ली। श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा वाडिया संस्थान के विशेषज्ञों से तप्तकुंड को उसके वास्तविक स्वरूप में लाने को पत्र लिखा गया। तब अक्तूबर 2016 और जनवरी 2017 में विशेषज्ञों ने यहां का वृृहद सर्वेक्षण किया था। विशेषज्ञों ने यहां स्रोत के सुरक्षित होने और अन्य कई स्रोतों के होने की बात भी कही थी। बीते वर्ष सिंचाई विभाग को तप्तकुंड के पुनरोद्धार की जिम्मेदारी गई थी, लेकिन बाद में इसे गढ़वाल मंडल विकास निगम को सौंप दिया गया। 
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गौरीकुंड का तप्तकुंड अपने मूल स्थान से करीब डेढ़ सौ मीटर आगे खिसक गया है। इसके संरक्षण के लिए प्रारंभिक स्तर पर कार्य शुरू कर दिया गया है। यहां पर पानी पूरी तरह से शुद्ध और पूर्व की भांति गर्म है। आगे का कार्य भू-गर्भीय विशेषज्ञों की मौजूदगी में किया जाएगा। हम, तप्तकुंड को लेकर किसी प्रकार का खतरा नहीं लेना चाहते, क्योंकि छोटी सी चूक से यहां पर प्राचीन गर्म पानी के स्रोत को भी नुकसान पहुंच सकता है। 
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- विजय नारायण उनियाल, महाप्रबंधक, निर्माण, जीएमवीएन  

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