वर्तमान परिवेश में पति-पत्नी या सास-बहू के बीच छोटी-छोटी बातों पर विवाद बढ़ रहे हैं। इससे घरों में कलह पैदा हो रही हैं। जो रिश्तों में खटास ला रही हैं। हालांकि इस खटास को मिठास में बदलने का महिला हेल्पलाइन की टीम भरसक प्रयास कर रही है। जिसमें काफी हद तक सफलता भी मिल रही है। विभागीय एक्सपर्ट के समझाने पर दोनों पक्षों का मनमुटाव दूर हो जाता है।
दून पुलिस की ओर से महिलाओं की सुरक्षा और उनसे संबंधित अपराधों के लिए महिला हेल्पलाइन चलाई जा रही है। इस हेल्पलाइन में ढाई साल में 3192 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से करीब 50 फीसदी यानी 1595 मामले ऐसे हैं, जिनमें घरों में होने वाली जरा सी कहासुनी ने रिश्तों को थाने की चौखट पर लाकर खड़ा कर दिया। इसके अलावा 307 मामले ऐसे हैं, जिनमें महिलाओं ने शिकायतें तो की, लेकिन वह सुनवाई की तारीख पर थाने पहुंची ही नहीं।
ऐसे मामलों में साल 2016 में महिला हेल्पलाइन में 1345 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जिनमें से 513 में थाने में समझौता हो गया। 194 मामलों में महिलाओं ने पैरवी नहीं की और 276 ने शिकायतें वापस ले लीं। इसी तरह वर्ष 2017 में 1156 शिकायतों में से 329 में समझौता हो गया, 103 में पैरवी नहीं की गई, 277 ने शिकायतें वापस ले लीं।
जबकि 2018 में अब तक दर्ज हुए 691 मामलों में 116 में समझौता हो गया है, दस में मामलों में पीड़ितों ने पैरवी नहीं और 84 शिकायतें वापस ले लीं गईं हैं। इस साल अभी तक दर्ज हुईं 691 शिकायतों में से 344 में सुनवाई नहीं हो पाई है। पुलिस का कहना है कि इन मामलों में संबंधित महिलाओं को बुलाकर समझाया जाएगा। ऐसे में हो सकता है कि इनमें से अधिकांश विवाद खत्म कर लेंगी। इन ढाई साल में दर्ज हुई 3192 शिकायतों में से 450 मामले फिलहाल थाने में चल रहे हैं जबकि 496 मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं।
इस संबंध में जब महिला हेल्पलाइन के कर्मचारियों से बात की गई तो पता चला कि अधिकांश मामलों में सुनवाई के दौरान सामने आता है कि घर में छोटी-छोटी बातों पर विवाद हो जाता है। मामला बढ़ने पर हेल्पलाइन तक पहुंच जाता है। यहां विभागीय एक्सपर्ट शिकायतकर्ता और आरोपी से बात करते हैं तो वह अपनी-अपनी गलती मानकर विवाद खत्म करने के लिए तैयार हो जाते हैं।
हेल्पलाइन पर शिकायत मिलने पर हमारी टीम तुरंत एक्शन लेती है। पीड़ित और आरोपी से मिलकर मामले को सुना जाता है। मामूली विवाद में दोनों पक्षों को समझाकर मामले का निपटारा करने का प्रयास किया जाता है। जिन मामलों में महिलाएं नहीं मानती हैं उनमें मुकदमा दर्ज कराने के लिए कह दिया जाता है।
- प्रदीप चौहान, प्रभारी निरीक्षक, महिला हेल्पलाइन