चारधाम यात्रियों के लिए आस्था का केंद्र माने जाने वाले गौरीकुंड में बने जल स्रोत को पुनर्जीवित किया जाएगा।
आपदा में बंद हो गए इस स्रोत को वापस आस्तित्व में लाने में करीब बीस करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसके लिए सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड ने राज्य सरकार को एक प्रस्ताव दिया है।
उत्तराखंड की नवनियुक्त त्रिवेंद्र सरकार की दूसरी कैबिनेट बैठक में यह प्रस्ताव पास कराने की तैयारी है। इसके अलावा भी कई अहम प्रस्तावों को शुक्रवार की बैठक में हरी झंडी दिए जाने की तैयारी है।
गौरीकुंड समुद्र तल से 1981 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। यहीं से केदारनाथ के लिए 14 किलोमीटर का पैदल रास्ता प्रारंभ होता है। गौरीकुंड में मंदाकिनी के दाहिने तट पर गर्म पानी के दो स्रोत हुआ करते थे।
चारधाम यात्रा के लिए आने वालों के लिए यह स्रोत आस्था के अलावा आकर्षण का प्रमुख केंद्र माना जाता था। मगर वर्ष 2013 की आपदा में यह स्रोत तबाह हो गए।
इसे दोबारा आस्तित्व में लाने के लिए सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड ने 20 करोड़ रुपये के खर्च संबंधी एक प्रस्ताव शासन को भेजा है। प्रस्ताव पर मंथन के बाद यह तय हुआ है कि शुक्रवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में इसे रखा जाएगा।
इस प्रस्ताव को पास किया जाना लगभग तय माना जा रहा है। इसी क्रम में गन्ना किसानों के बकाए, राशन की दुकानों पर स्वाइप मशीन लगाने, राज्य खाद्य योजना के अंतर्गत कवर होने वालों को अनाज देने समेत तमाम फैसले भी संभावित हैं।
रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत हेली सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियों को एटीएफ (एयर टर्बाइन फ्यूल) में दी जाने वाली राहत को लेकर संशोधन भी कैबिनेट बैठक में किया जाना है। इसके अतिरिक्त गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) को राज्य में लागू करने और स्टेट जीएसटी बिल को भी कैबिनेट से पास किए जाने की तैयारी है।