मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि सहस्रधारा रोड स्थित ट्रंचिंग ग्राउंड में एकत्र कूड़े से ईको एंजाइम तैयार की जाएगी। 187 देशों में सफल प्रयोग के बाद राज्य में पहली बार इसका प्रयोग हो रहा है। उन्होंने कहा कि कचरे में तमाम ऐसे कण होते हैं, जिससे तापमान में 20 डिग्री की बढ़ोतरी होती है। ईको एंजाइम के जरिये इस पर अंकुश लगेगा।
बृहस्पतिवार को ट्रंचिंग ग्राउंड में सीएम त्रिवेंद्र रावत और महापौर विनोद चमोली ने ईको एंजाइम का छिड़काव किया। महापौर ने बताया कि सीएम की स्वीकृति के बाद यह कार्य एसएसआरडी (श्रीश्री रुरल डेवलपमेंट) को दिया गया है। उन्होंने कहा कि सब्जी मंडी, स्कूल और कॉलेजों में बात की जाएगी, जिससे वहां कूड़े से खाद बनाई जा सके। आर्ट ऑफ लिविंग के टीचर अनिल कपूर ने बताया कि तीन हजार लीटर पानी में पांच लीटर ईको एंजाइम का घोल मिलाया जाता है।
कूड़े पर इसका छिड़काव करने से बदबू गायब हो जाती है। साथ ही, कांच, लोहा, पॉलीथिन को छोड़कर शेष कूड़ा अलग हो जाता है। सीएम ने कहा कि रिस्पना और बिंदाल को भी फिल्टर करने की योजना बनाई जा रही है। इस दौरान लोगों ने महापौर विनोद चमोली के समक्ष कई मांगें रखी। महापौर ने बताया कि तीन माह में शीशमबाड़ा प्लांट तैयार हो जाएगा। जिससे कूड़े की समस्या का समाधान हो जाएगा। इस मौके पर नगर आयुक्त रवनीत चीमा, वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके सिंह, आर्ट ऑफ लिविंग के स्टेट कोआर्डिनेटर राकेश मिश्रा आदि मौजूद रहे।
ऐसे बनती है ईको एंजाइम
तीन सौ मिली ग्रीन वेस्ट (फल व सब्जी के छिलके) में 100 ग्राम गुड़ व एक लीटर पानी मिलाकर उसे एक माह के लिए बोतल में रखें। इस दौरान बोतल का ढक्कन ढीला रखें। तीन माह बाद ईको एंजाइम तैयार हो जाएगा। इसे खाद के तौर पर भी प्रयोग किया जा सकता है।
घर में कर सकेंगे इस्तेमाल
ईको एंजाइम का प्रयोग घर में टॉयलेट, किचन, फर्श की सफाई में कर सकते हैं। इससे मच्छर-मक्खी भी नहीं आएंगे। इतना ही नहीं सीवर या टैंक चोक होने पर इसका प्रयोग करें। वहीं, ओजोन परत डेवलेप करने में भी यह अपनी भूमिका निभाएगा।