भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी की रैली में जनता जनार्दन की उपस्थिति ऐतिहासिक साबित हुई है। रैली में मोदी को सुनने के लिए लोगों का ऐसा हुजूम उमड़ा कि इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी की रैलियों में उमड़े जन सैलाब को पीछे छोड़ दिया।
मैदान से राजमार्ग को जोड़ने वाले करीब चार हेक्टेयर के क्षेत्र में भी लोग ही लोग नजर आ रहे थे।
जानकार कहते हैं कि उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद जब हेमवती नंदन बहुगुणा की पहली बार श्रीनगर में सभा हुई थी, तो ऐसी ही भीड़ थी।
मैदान पर नजर आई ऐतिहासिक भीड़
नरेंद्र मोदी को सुनने के लिए लोग सुबह से जीआईएंडटीआई मैदान पहुंचने लगे थे। सुबह 10 बजकर 15 पर मैदान आधा भर गया था जबकि श्रीनगर की सड़कों में रैली निकालते हुए बड़ी संख्या में लोग मैदान की तरफ पहुंचते रहे।
मोदी के इंतजार में मैदान में बैठे लोग बार-बार घड़ी या मोबाइल पर नजरें गड़ा रहे थे। 12 बजे मोदी का हेलीकॉप्टर आता दिखाई दिया, तो मैदान में एकत्रित जन समूह उठ खड़ी हुई।
मैदान तो रैली में आए लोगों से भरा ही था, मैदान के बाहर राजमार्ग और उसको जोड़ने वाले मार्ग पर भी लोग खड़े थे। मैदान से सटे गढ़वाल विवि के प्रशासनिक भवन में कर्मचारी छत पर मोदी को सुनने पहुंच गए। जहां से भी मंच नजर आता, वहां बने भवनों की छतें मोदी को सुनने के लिए खचाखच भरी दिखाई दी।
'पहली बार देख रहा हूं दोमंजिला मंच'
मोदी को सुनने वालों की भीड़ ने भी मोदी को उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों का आभास कराया। वे बोले मैं पहली बार श्रोताओं का दुमंजिला मंच देख रहा हूं। एक दर्शक दीर्घा मेरे सामने है और दूसरी राजमार्ग की ओर इशारा करते हुए कहा- वहां खड़ी है।
भीड़ देखकर सभी आश्चर्य में
चमोली के 70 वर्षीय दलबीर सिंह, रुद्रप्रयाग से पहुंचे आपदा प्रभावित राजेश्वर सिंह व देवेश्वरी देवी और पौड़ी से आए प्रवेश भारती ने कहा कि आज तक इतनी भीड़ किसी मेले में भी नहीं देखी।
पूर्व पालिकाध्यक्ष रहे कृष्णानंद मैठाणी व सामाजिक कार्यकर्ता अनिल स्वामी कहते हैं कि मुख्यमंत्री बनने के बाद जब स्व. हेमवती नंदन बहुगुणा जीआईएंडटीआई मैदान में सभा करने पहुंचे थे, तो ऐसी ही भीड़ हुई थी, लेकिन यह पहली चुनावी सभा है जिसमें ऐसी भीड़ हुई।
'ऐसा लगा, हर रोज आते हैं मोदी'
मोदी ने भाषण की शुरूआत इस तरह की जैसे वे पहली बार नहीं, बल्कि हर रोज आते हैं। उन्होंने कहा कि यहां की धरती से गहरा नाता रहा है। यहां का जीवन और लोग बेहद परिश्रमी हैं। इन सबने जीवन में मुझे बहुत कुछ सिखाया है।
मां-बेटे के बहकावे में न आना
मोदी ने यहां भी अपने चिरपरिचित अंदाज में मां-बेटे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहाड़ के लोग बहुत भोले होते हैं और मां-बेटे बरगलाने में आ जाते हैं। इसलिए इस बार मां-बेटे के बरगलाने में मत आना।