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गढ़वाल विवि: कुलसचिव के आवास में घुसकर नारेबाजी करने के मामले में 50 छात्रों पर मुकदमा

Sun, 01 Sep 2019 10:03 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर(पौड़ी)
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सांकेतिक तस्वीर
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गढ़वाल विवि कुलसचिव के आवास में घुसकर नारेबाजी करने केमामले में बिड़ला परिसर छात्रसंघ के कार्यकारी अध्यक्ष समेत चार छात्र नेताओं के खिलाफ नामजद केस दर्ज हो गया है। मामले में 40-50 अज्ञात छात्र-छात्राओं को भी आरोपी बनाया गया है। कुलसचिव डा. एके झा ने छात्र-छात्राओं पर घर के आंगन में घुसकर नारेबाजी करने और अभद्रता करने का आरोप लगाया है। वहीं, छात्र नेताओं ने इस पर आक्रोश जताते हुए कहा कि विवि के अधिकारी छात्रों के आंदोलन को कुचलने के लिए मुकदमे को हथियार बना रहे हैं। 

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एक पीआईएल के संबंध में नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के बाद गढ़वाल विवि प्रशासन ने 29 अगस्त को छात्रसंघ चुनाव प्रक्रिया स्थगित कर दी थी। छात्रों का कहना था कि कोर्ट ने कहीं भी चुनाव प्रक्रिया रोकने का जिक्र नहीं किया था। विवि ने जबरन प्रक्रिया रोकने का आदेश जारी कर दिया। जब 30 अगस्त को वह विवि के कुलपति और कुलसचिव से मिलने कार्यालय में गए, तो वह नहीं मिले। जिस पर छात्र अपनी बात रखने बिड़ला परिसर स्थित कुलसचिव आवास गए, लेकिन वहां उनकी पत्नी के मौजूद होने पर वह बाहर आकर सड़क पर धरने पर बैठ गए।

घर में छात्रों के पहुंचने से नाराज कुलसचिव डा. झा ने तहरीर देते हुए आरोप लगाया कि छात्रों ने सुरक्षा गार्ड को धक्का देकर आवास के आंगन में जाकर नारेबाजी की। जब वह घर के अंदर घुसने के कोशिश करने लगे, तो उनकी पत्नी ने मना किया। आरोप लगाया कि छात्र-छात्राओं ने उनकी पत्नी के साथ अभद्रता की।  कोतवाल एनएस बिष्ट ने बताया कि कुलसचिव की तहरीर के आधार पर छात्रसंघ के कार्यकारी अध्यक्ष अंकित उछोली, अतुल सती, अमित प्रदाली और नरेश नेगी सहित 40-50 अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज हुआ है।  इधर, आईएस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अतुल सती ने बताया कि विवि के कुलपति और कुलसचिव हमेशा आदेश जारी करने के बाद गायब हो जाते हैं। जब  दो घंटे इंतजारी के बाद कुलसचिव कार्यालय नहीं आए, तो छात्र उनके आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। किसी भी छात्र की उनकी पत्नी के साथ बातचीत नहीं हुई।
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छात्रों के खिलाफ की जा सकती थी अनुशासनात्मक कार्रवाई
छात्रों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराने से विवि ने एक बार फिर आंदोलन को भड़काने का काम किया है। जबकि विवि छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता था। लेकिन ऐसा न करके सीधे पुलिस कार्रवाई कर दी गई। पहले भी छात्रों पर मुकदमे दर्ज होने से यहां आंदोलन हुए हैं। अब विवि ने छात्रों को एक और मौका दे दिया है।

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