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भगवान श्रीकृष्ण से लिया संतान प्राप्ति का आशीर्वाद

Wed, 27 Nov 2013 04:04 PM IST
अमर उजाला, लंबगांव (टिहरी)
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पांचवें धाम के रूप में प्रसिद्ध सेम मुखेम मेले में हजारों की संख्या में पहुंचे भक्तगणों ने भगवान श्रीकृष्ण से सुख समृद्धि की मन्नतें मांगी। मंदिर परिसर दिनभर श्रीकृष्ण के जयकारे गूंजता रहा। निसंतान दंपतियों ने भी भगवान श्रीकृष्ण से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद लिया।
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सीएम ने भी की पूजा
मंगलवार को मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने भी मेले में पहुंचकर देव डोलियों की पूजा अर्चना की। मेेले में देव डोलियों का मिलन खास आकर्षण का केंद्र रहा। सोमवार की शाम से ही मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था जो मंगलवार दोपहर तक जारी रहा। सोमवार की रात को मंदिर में कीर्तन-भजन का दौर चला।

विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी विभागों की ओर से प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। लोगों ने मेले से जमकर खरीदारी भी की। मंदिर समिति की ओर से भक्तों के लिए भंडारे की व्यवस्था की गई थी।
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यह है मान्यता
सेम मुखेम में भगवान श्रीकृष्ण को नागराजा के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि कृष्ण भगवान ने यहां अवतार लिया था। तब यहां प्रवास के लिए उन्होंने गंगू रमोला से भूमि मांगी थी लेकिन रमोला ने भूमि देने से मना कर दिया। गंगू रमोला की कोई संतान नहीं थी।

भगवान श्रीकृष्ण ने गंगू रमोला को सपने में दर्शन देकर उसे दो पुत्रों की प्राप्ति का वरदान दिया। इसके बाद गंगू रमोला ने श्रीकृष्ण को सेम मुखेम में भूमि प्रदान की। कहा जाता है कि इस भूमि पर भगवान ने अपनी रास लीला रचाई। तब से इस स्थान पर हर तीसरे वर्ष 11 गते मागशीर्ष को मेले का आयोजन किया जाता है।

देव डोलियों का अदभुत मिलन
सेम मुखेम मेेले में क्षेत्र के दर्जनों देवों की डोलियों का तीसरे वर्ष मिलन होता है। इस वर्ष सेम नागराजा के निशान, मुखमाल गांव से देवी की डोली, बिन्याली देवी की डोली, नागणी की डोली, भैरव के निशान सेम मुखेम पहुंचे। सभी देव डोलियों का मिलन मडबागीसौड़ में होता है। वहां से देव डोलिया, निशान और भक्तगण नृत्य करते हुए सेम-मुखेम पहुंचते हैं। मडबागीसौड़ से लेकर सेम मुखेम तक देव डोलिया आपस में एक दूसरे से कई बार लिपट-लिपट कर मिलते रहे।

श्रद्धालुओं को जूझना पड़ा जाम से
सेम मुखेम मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए दूर-दूर से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को कई बार जाम का सामना करना पड़ा। कौडार-दीनगांव-मुखेम मोटर मार्ग पर वाहनों की संख्या अधिक होने के कारण जगह-जगह जाम की स्थिति रही।

स्वच्छ छवि के चुने प्रत्याशी
संवेदना समूह उत्तरकाशी ने सेम मुखेम मेले में पंचायती राज पर नुक्कड नाटक आयोजित कर आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में स्वच्छ और ईमानदार छवि के प्रत्याशियाें को चुनने का संदेश दिया। समूह के अध्यक्ष जयप्रकाश राणा के नेतृत्व में टीम के सदस्यों ने ढोल-दमाऊ और वाद्य यंत्रों का प्रदर्शन किया गया।

नेगी के गीतों पर झूमे भक्तगण
सेम मुखेम मेले में लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों की धूम रही। द्वारिका नारायण जागर गीत के साथ नेगी ने कार्यक्रम का शुभांरभ किया तो पंडाल में मौजूद सभी लोग भक्ति में लीन हो गए। नेगी ने गंगू रमोला के पवाणा की प्रस्तुति देकर श्रोताओं का खूब मनोरंजन किया। ठंडो रेे ठंडो और जय मां जगदंबा भवानी की प्रस्तुति पर भक्तगण भी झूम उठे।
 
रातभर चला जागरण
कड़ाके की ठंड में भी सेम मुखेम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास डगा नहीं। अलाव जलाकर रातभर मंदिर परिसर में भजन और कीर्तन का दौर जारी रहा। कभी डैर-थगुली तो कभी ढोल-दमाऊं की थाप पर भक्तगण थिरकते रहे। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु रातभर श्रीकृष्ण की लीला में तल्लीन रहे।

विधायक ने देव डोली पर चढ़ाया चांदी से बना झामण
क्षेत्रीय विधायक मालचंद ने उपला धेवरा गांव के नागराज देवता की डोली के लिए करीब सात लाख रुपये लागत का चांदी से बना झामण अर्पित किया। इस मौके पर आयोजित समारोह में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत भी शामिल हुए।

मंगलवार को उपला धेवरा गांव के नागराज मंदिर प्रांगण में हुए समारोह में तीरथ सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड अनादिकाल से ही देवभूमि रही है। यहां की संस्कृति एवं कण-कण में देवताओं का वास है। विधायक मालचंद ने कहा कि पहाड़ की संस्कृति में देव डोलियां ही शक्ति का प्रमुख केंद्र हैं।
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