उत्तराखंड गठन के पंद्रह साल बाद भी पंचायत राज अधिनियम को नए संशोधनों के साथ लागू नहीं किया जा सका है।
इससे गांवों का विकास प्रभावित हुआ है। यह कहना है गांव बचाओ आंदोलन के प्रणेता पद्मश्री अनिल जोशी का। उन्होंने कहा कि इन सभी मामलों को लेकर गांव बचाओ अभियान के तहत 28 फरवरी को दून में प्रदेश भर से ग्राम प्रधान जुटेंगे।
पद्मश्री अनिल जोशी ने कहा कि किसी भी प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण इकाई उसके गांव हैं, लेकिन उत्तराखंड में गांवों की अनदेखी हुई है। यही वजह है कि पलायन लगातार बढ़ा है और आबाद गांव खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं।
गांवों की स्थिति पिछले कुछ सालों में सुधरने के बजाए और खराब हुई है। गांवों को मजबूत करना है तो ग्राम प्रधानों व पंचायतों को मजबूत करना होगा।
इन सब बिंदुओं पर 28 फरवरी को अग्रवाल धर्मशाला में सुबह दस बजे से शाम चार बजे तक प्रधानों का सम्मेलन होगा। सम्मेलन में सभी तेरह जिलों के प्रधान और प्रधान संगठनों के प्रतिनिधि प्रतिभाग करेंगे।
इन बिंदुओं पर होगी चर्चा
- राज्य में पंचायती राज व्यवस्था के क्रियान्वयन
- वर्तमान में प्रधानों के वेतन व देय सुविधाओं पर
- भविष्य में उत्तराखंड के विकास में प्रधानों की भूमिका
- ग्राम प्रधानों के कार्यानुभव पर