बावजूद इसके उसकी जान को खतरा मानते हुए लाइसेंस जारी कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक उसका चरित्र प्रमाणपत्र बनाने में भी बड़ा खेल किया गया। इसमें प्रशासनिक अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान उठ रहे हैं। यह सब उस वक्त हुआ जब वह महज एक साल पहले 2021 में ही जेल से छूटकर उत्तराखंड आया था। सूत्रों ने बताया कि हत्याकांड की जांच में भी इन सब पहलुओं की जांच भी की जा रही है।