खास परिस्थिति में रह पाते हैं घड़ियाल
सर्वे और अध्ययन से जुड़े बायोलाजिस्ट आशीष पांडा बताते हैं कि घड़ियाल बहुत खास परिस्थिति में रह पाता है। उसके लिए सही तापमान, सही पानी चाहिए। वहीं घड़ियाल हर चीज खाता भी नहीं और डिस्टरबेंस भी पसंद नहीं है। यही कारण है कि घड़ियाल के अस्तित्व को लेकर कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। इसमें रेत का खनन भी शामिल है। इसके अलावा कई बार मछली पकड़ने वाले जाल को खराब होने के बाद नदी में फेंक दिया जाता है, उसमें फंसने के बाद मौत के मामले सामने आते हैं। इसके अलावा नदियों में बढ़ता प्रदूषण भी बड़ी चुनौती है।
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घड़ियालों के संरक्षण के लिए टास्कफोर्स बनाने की संस्तुति
घड़ियालों के संरक्षण के लिए कई संस्तुतियां की गई हैं। इसमें एक टास्कफोर्स बनाने की भी बात है जिसके अधीन घड़ियाल संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्थाएं कार्यरत हों। वहीं पानी में जाल न फेंकने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की भी आवश्यकता है। इसके अलावा तकनीक का इस्तेमाल करते हुए घड़ियाल पर अध्ययन की आवश्यकता को बताया गया है। प्रदूषण का स्तर कम होता है और अगर स्थितियां बेहतर होती हैं तो संभव है कि आने वाले समय में सोन, कोसी, गंडक नदियों में घड़ियाल की संख्या बढ़ सके। इस अध्ययन में भारतीय वन्यजीव संस्थान की संकाय अध्यक्ष डॉ रुचि बडोला, डॉ. शिवानी बर्थवाल, डॉ एसए हुसैन आदि मौजूद थे।