फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सच में मैली हो गई 'गंगा', नहाने लायक भी नहीं रहा पानी

Fri, 19 May 2017 08:37 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
ganga snan at haridwar - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
'पापियों के पाप' धोने वाली गंगा नदी अब आपको बीमार कर सकती है। नदी का पानी इतना गंदा है कि पीना तो दूर, नहाने लायक भी नहीं बचा है।
विज्ञापन


केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आरटीआई के जवाब में बताया है कि हरिद्वार में गंगा नदी का पानी नहाने के लिए भी ठीक नहीं है।

बोर्ड ने कहा कि हरिद्वार जिले में गंगा का पानी तकरीबन हर पैमाने पर असुरक्षित है। हरिद्वार के 20 घाटों में रोजाना हजारों श्रद्धालु डुबकी लगाते हैं। 

बोर्ड ने उत्तराखंड में गंगोत्री से लेकर हरिद्वार जिले तक 11 लोकेशन्स से पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए सैंपल लिए गए थे।

पानी की गुणवत्ता जांच के रखे गए चार मानक 

ganga snan harki paidi - फोटो : AmarUjala
बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक आरएम भारद्वाज ने बताया, इतने लंबे दायरे में गंगा के पानी की गुणवत्ता जांच के चार  मानक रखे गए।

जिनमें तापमान, पानी में घुली ऑक्सिजन, बायलॉजिकल ऑक्सिजन डिमांड और कॉलिफॉर्म(बैक्टीरिया) शामिल हैं। हरिद्वार के पास के इलाकों के गंगा के पानी में बायलॉजिकल ऑक्सिजन डिमांड, कॉलिफॉर्म और अन्य जहरीले तत्व पाए गए। 

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में पाया गया कि नहाने के एक लीटर पानी में बायलॉजिकल ऑक्सिजन डिमांड का स्तर 6.4 मिलीग्राम से ज्यादा है। जबकि यह तीन मिलीग्राम से कम होना चाहिए।
विज्ञापन

पानी में मिले ये तत्व मानकों से ज्यादा

ganga snan
हरिद्वार के प्रमुख घाटों के पानी में कॉलिफॉर्म भी ज्यादा पाया गया। प्रति 100 एमएल पानी में 90 एमपीएन (मोस्ट प्रॉबेबल नंबर) होना चाहिए वह 1,600 मिला।

बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक नहाने के पानी में इसकी मात्रा प्रति 100 एमएल में 500 एमपीएन या इससे कम होनी चाहिए। 

इतना ही नहीं, हरिद्वार के पानी में घुली ऑक्सिजन का स्तर भी चार से 10.6 एमजी पाया गया, जबकि पाचं एमजी होना चाहिए। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें