मातृसदन में संपन्न हुए दो दिवसीय सम्मेलन के बाद पत्रकारों से वार्ता करते हुए मातृसदन के प्रमुख स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि एक जमाना था जब भारत विश्व गुरु था, लेकिन आज हम इस दिशा में बहुत पिछड़ गए हैं। अब तो हम विश्व शिष्य होने की भी योग्यता नहीं रखते।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रो. जीडी अग्रवाल उर्फ ज्ञान स्वरूप सानंद ने डेढ़ साल पहले गंगा की अविरलता के लिए 111 दिन तक आमरण अनशन करते हुए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया था। बताया कि प्रो. जीडी अग्रवाल रुड़की यूनिवर्सिटी और बनारस बनारस यूनिवर्सिटी से जुड़े रहे, कानपुर में भी उन्होंने शिक्षण कार्य किया और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संस्थापक सदस्य सचिव भी रहे। बावजूद इसके किसी एक संस्था ने उनके लिए दो शब्द तक नहीं कहे। कहा कि उनके दो शिष्य गंगा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे चुके हैं।
पद्मावती आमरण अनशन कर रही है। सभी को यह प्रयास करना चाहिए कि केंद्र सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाएं। उन्होंने पद्मावती के आंदोलन और दो दिन के सम्मेलन से हरिद्वार के संतों, शिक्षाविदों आदि द्वारा दूरी बनाए रखे जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। कहा कि यह बात लोगों की इस मानसिकता को दर्शा रही है कि वे सब गंगा का अपने स्वार्थ के लिए दोहन करने को तो तैयार हैं, लेकिन उन्हें गंगा के हित की कोई चिंता नहीं है। जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि इस सम्मेलन की गूंज पूरी दुनिया तक पहुंचेगी सभी साथियों ने काम करने का निर्णय लिया है।