तीन कायिक, चार वाचिक और तीन मानसिक इन दस पापों का विनाश करने वाला गंगा दशहरा स्नान आज है। इस मौके पर भारी संख्या में भक्त हरिद्वार के विभिन्न घाटों में स्नान और पितृ तर्पण कर रहे हैं।
दस योगों में से छह योग होने के कारण 14 जून को गंगा दशहरा स्नान सवेरे प्रारंभ हुआ। आज दशमी तिथि संपूर्ण है। हस्त नक्षत्र में गंगा स्नान पूरे दिन चलेगा।
इस दिन गंगा में दस गोते लगाकर पितृ तर्पण करने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर हो जाती हैं। मुख्य रूप से गंगा के धरती पर आगमन का यह पर्व हरिद्वार आदि मैदानी तीर्थों पर मनाया जाता है।
शास्त्रों में कायिक, वाचिक और मानसिक पापों के निवारण के लिए गंगा के मैदानों में आने का दिन गंगा दशहरा नियत किया गया है। इस दिन गंगा आदि पवित्र नदियों और तालाबों में स्नान कर दस गोते लगाने का महत्व है।
मनुष्य अपने जीवन में अनेक पाप करता है। ऐसे दस पापों को क्षमा करने का अवसर दस प्रकार के योग से युक्त गंगा दशहरा देता है। मुख्य रूप से यह पर्व स्नान का पर्व है। स्नानोपरांत पितृ तर्पण करने से पितरों का मोक्ष हो जाता है।