गंगा बेसिन की चार जल विद्युत परियोजनाओं के प्रस्तावों पर रोक लगा दी गई है।
इन विद्युत जल परियोजनाओं को स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने तो पास कर दिया था, लेकिन नेशनल बोर्ड ने इनके प्रस्तावों पर रोक लगाने के साथ ही केंद्रीय जल संसाधन एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्रालय से इस संबंध में राय मांगी है। मंत्रालय नमामि गंगा परियोजना की नीति के लिहाज से इन परियोजनाओं की स्थिति स्पष्ट करेगा। यमुना की सहयोगी नदी टौंस पर सिर्फ एक प्रोजेक्ट को ही हरी झंडी दी गई है।
गंगा बेसिन की इन परियोजनाओं को नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने इसके पहले भी निरस्त कर दिया था। तब प्रदेश शासन ने इको सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) का प्रस्ताव तैयार नहीं किया था। यह कहा गया था कि ईएसजेड का प्रस्ताव आने के बाद इन प्रोजेक्ट पर विचार किया जाएगा। इको सेंसिटिव जोन का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास जमा करने के बाद प्रदेश शासन ने इन प्रस्तावों को फिर स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड की कार्ययोजना में शामिल कर लिया।
यह चार प्रोजेक्ट गंगा बेसिन में अलकनंदा, धौलीगंगा, मधु गंगा आदि नदियों के किनारे प्रस्तावित हैं। जिन स्थलों पर यह प्रोजेक्ट प्रस्तावित किए गए हैं। वह केदारनाथ वाइल्ड लाइफ सैंक्च्युरी, नंदा देवी नेशनल पार्क से 10 किमी के दायरे में आते हैं। यमुना बेसिन की टौंस नदी पर जाखौल संकरी हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (51 मेगावाट) को अनुमति दी गई है। यह परियोजना गोविंद नेशनल पार्क से 10 किमी की दूरी पर है।
प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक की ओर से बोर्ड को बताया गया कि यह परियोजना गंगा बेसिन में नहीं आती। गंगा बेसिन की जो परियोजना रिजेक्ट हुई हैं, उनमें सिंगोली-भटवारी हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (99 मेगावाट), एनटीपीसी का लता तपोवन हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (171 मेगावाट) और तपोवन विष्णुगाड हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (520 मेगावाट) हैं। केंद्रीय जल संसाधन एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्रालय की राय मिलने के बाद इन पर प्रस्तावों पर निर्णय लिया जाएगा।
25 मेगावाट की योजनाओं पर पुनर्विचार
भागीरथी इको सेंसिटिव जोन क्षेत्र में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन की विशेषज्ञ कमेटी की ओर से पुनर्विचार का इशारा मिलने के बाद शासन ने जोन में 25 मेगावाट जल विद्युत परियोजनाओं के संबंध में सर्वे कराने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश शासन ने कमेटी के सामने पक्ष रखा था कि हिमाचल प्रदेश में 25 मेगावाट तक परियोजनाएं चल रही हैं। जोन में 16 परियोजनाएं प्रस्तावित हैं जिनमें 11 परियोजनाएं 25 मेगावाट से छोटी हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लगा प्रतिबंध हटा
भागीरथी बेसिन की 24 जल विद्युत परियोजनाओं को छोड़कर गंगा और यमुना बेसिन में जल विद्युत परियोजनाओं पर लगा प्रतिबंध सुप्रीम कोर्ट ने हटा लिया है। एक याचिका के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंध के निर्देश दिए थे। इसके बात भारतीय वन्य जीव संस्थान से रिपोर्ट मांगी गई। संस्थान सिर्फ भागीरथी बेसिन की 24 परियोजनाओं को ही जल जंतुओं और पर्यावरण के लिए नुकसानदेह बताया है।