नौकरी दिलाने के नाम पर लखनऊ से दून लाई गई युवती से गैंगरेप के छह दोषियों को अदालत ने दस साल की कठोर कैद और पचास हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है।
मामले का मुख्य आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। सभी दोषी कानपुर, सहारनपुर और देहरादून के हैं।
नौकरी का ऑफर
मामला जून 2012 का है। मूलत: पश्चिम बंगाल की रहने वाली और दिल्ली के एक कॉलेज में एमबीए की छात्रा का संपर्क इंटरनेट पर लखनऊ निवासी दीपेश पांडे से हुआ।
दीपेश ने युवती को लखनऊ के एक होटल में 30 हजार रुपये प्रतिमाह पर रिसेप्शनिस्ट की नौकरी का ऑफर दिया।
युवती ने हां की तो दीपेश ने 10 मई 2012 को उसकी ईमेल पर टिकट भिजवा दिया। युवती लखनऊ पहुंची तो दीपेश ने उसे गोमतीनगर स्थित होटल नवाब इन में नौकरी दिलवा दी।
15 दिन तक यहां काम करने के बाद युवती ने दीपेश से माहौल ठीक न होने पर नौकरी छोड़ने की बात कही। उसका कहना था कि होटल में हर रात कई युवतियां कमरों में जाती हैं और सुबह होते ही निकल जाती हैं।
रिवाल्वर की नोक पर दुराचार
युवती का कहना था कि इसके बाद दीपेश उसे नौकरी दिलाने का झांसा देकर देहरादून ले आया। यहां 20 जून 2012 को उसने युवती को दीपक चौधरी के हवाले कर दिया।
दीपक ने अपने साथियों महमूद, अतुल त्रिवेदी और तीन अन्य के साथ मिलकर युवती को एक कमरे में बंधक बना लिया और एक सप्ताह तक रिवाल्वर की नोक पर दुराचार किया।
कई दिन बाद मौका पाकर युवती ने 100 नंबर पर जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस ने उसे छुड़ाया। दुराचार के सभी आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए, लेकिन दीपेश पांडे अब तक फरार है। बृहस्पतिवार को अपर सत्र न्यायाधीश षष्ठम पंकज तोमर की अदालत में मामले की सुनवाई हुई।
देह व्यापार में धकेल दिया
अभियोजन पक्ष ने आठ गवाह पेश किए। शासकीय अधिवक्ता जया ठाकुर ने दोषियों को कड़ी सजा की अपील की। कहा कि आरोपी युवतियों को नौकरी का झांसा देकर फंसाते थे, उनकी तस्वीरें इंटरनेट पर अपलोड कर दी जाती थीं और फिर उन्हें देह व्यापार में धकेल दिया जाता था। अदालत ने छहों आरोपियों को दस साल की सजा सुनाई।