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Dehradun News: वाहनों का फर्जी इंश्योरेंस कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़, रुड़की के दो दलाल गिरफ्तार

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एसटीएफ ने कमर्शियल वाहनों का फर्जी इंश्याेरेंस सर्टिफिकेट बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में रुड़की एआरटीओ के बाहर से दो दलालों को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह के सदस्य चौपहिया और कमर्शियल वाहनों का दोपहिया में इंश्योरेंस करा देते थे। ऐसे में कंपनियों को तो नुकसान पहुंच रही रहा था। साथ ही सरकार को जीएसटी का चूना लगाया जा रहा था। गिरोह के बाकी सदस्यों की भी एसटीएफ ने तलाश शुरू कर दी है।
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एसएसपी एसटीएफ आयुष अग्रवाल ने बताया कि सूचना मिली थी कि रुड़की में कमर्शियल वाहनों के फर्जी इंश्योरेंस और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट बनाए जा रहे हैं। इसका सत्यापन किया गया तो सूचना सही पाई गई। इस क्रम में बृहस्पतिवार शाम को रुड़की एआरटीओ कार्यालय के सामने एक ऑफिस में छापा मारा गया। यहां से बहुत से इंश्योरेंस बरामद हुए। इसके बाद ऑफिस में मौजूद दो युवकों अब्दुल कादिर निवासी रुड़की और कबीर निवासी भोरी, बहादराबाद को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में इन्होंने बताया कि उनके गिरोह में आठ से 10 लोग शामिल हैं। ये अलग-अलग जगहों पर इस तरह से फर्जी इंश्योरेंस बनाते हैं।


आरोपी चौपहिया वाहनों का दोपहिया में इंश्योरेंस करा देते थे। इस तरह 25 हजार रुपये का इंश्योरेंस सात से आठ हजार रुपये में ही हो जाता था। इस इंश्योरेंस से क्लेम नहीं मिलता लेकिन ये पुलिस या अन्य किसी की पकड़ में नहीं आता है। आरोपियों के खिलाफ रुड़की सिविल लाइन थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया गया। आरोपियों के पास से एक लैपटॉप, एक प्रिंटर, 29 वाहनों के फर्जी बीमा, 32 वाहनों की मूल आरसी, 22 वाहन चालकों के डीएल और तीन मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। आरोपियों को न्यायालय के आदेश पर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
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ऐसे करते थे फर्जीवाड़ा
किसी भी ऑनलाइन इंश्योरेंस पॉलिसी के माध्यम से इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया जाता था। वेबसाइट खोलते ही वहां पर कई ऑप्शन आते हैं। मसलन आपको चौपहिया का इंश्योरेंस करना या दोपहिया का। जालसाज चौपहिया का इंश्योरेंस करते वक्त दोपहिया ऑप्शन को चुनते हैं। इसके बाद चौपहिया नंबर का रजिस्ट्रेशन नंबर अपलोड किया जाता है। वेबसाइट वाहन की डिटेल तो फेच करती है लेकिन यह नहीं दर्शाती कि ये चौपहिया या दोपहिया। इसके बाद कंपनियां अपने-अपने इंश्योरेंस कोट भेज देती हैं। दोपहिया का इंश्योरेंस सस्ता होता है तो इसे चुनकर ही पैसे जमा कर दिए जाते हैं। इसके बाद जो पॉलिसी आती है उसे एडिट कर चौपहिया या कमर्शियल वाहन का चेसिस और इंजिन नंबर इसमें लिख दिया जाता है। इस तरह असली दिखने वाली एक फर्जी इंश्योरेंस पॉलिसी का सर्टिफिकेट तैयार हो जाता है।

2021 में देहरादून में भी पकड़ा गया था गिरोह
एसटीएफ ने वर्ष 2021 में भी इस तरह का एक गिरोह पकड़ा था। एसटीएफ ने उस वक्त तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। ये लोग भी इसी तरह से फर्जीवाड़े को अंजाम देते थे। इस कार्रवाई के बाद कुछ समय तो सबकुछ ठीक चला लेकिन फिर से इस तरह के मामले सामने आए हैं। इसके लिए अब एसटीएफ सरकार को भी पत्र लिख रही है।

जीएसटी की भी होती है चोरी
इस तरह के फर्जीवाड़े में जालसाज कंपनियों को तो नुकसान पहुंचा ही रहे हैं। साथ ही जीएसटी चोरी के रूप में सरकार को भी हानि पहुंचाई जा रही है। बीमा पॉलिसी पर 28 फीसदी जीएसटी होती है। ऐसे में जिस वाहन का 25 से 30 हजार रुपये में इंश्योरेंस होता है उसके लिए केवल सात-आठ हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं। इस तरह जीएसटी भी एक चौथाई ही सरकार के खाते में जा रही है।
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