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जन्माष्टमी के बाद अब शुरू हुई गणपति के आगमन की तैयारियां, खास योग में होगी स्थापना

Tue, 27 Aug 2019 08:21 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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भाद्रपद, अश्विनी एवं कार्तिक के महीने पर्वों के महीने हैं। इन तीनों महीनों में लगभग प्रतिदिन ही कोई न कोई पर्व पड़ता है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के बाद अब गणपति उत्सव मनाया जाएगा। इस तैयारियां भी धर्मनगरी में शुरू हो गई हैं।

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गणपति उत्सव संपन्न होते ही 16 दिनों का श्राद्ध पक्ष प्रारंभ हो जाएगा। 30 अगस्त को कुशोत्पाटिनी अमावस्या पड़ रही है। इस अमावस्या पर श्राद्ध पक्ष के साथ-साथ वर्ष भर संचय के लिए पवित्र कुशाएं वनों से प्राप्त की जाएगी। दो सितंबर से गणपति धराधाम पर आ जाएंगे।

11 दिनों तक गणपति की वंदना गणपति पंडालों में होगी। धर्मनगरी हरिद्वार में गणपति पूजा के दर्जनों पूजा पंडाल बनाए जाते हैं। प्रत्येक पंडाल में दिन के हिसाब से 11 दिन तक श्रीगणेश के विभिन्न रूपों की पूजा अर्चना चलेगी।

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व्रज योग और हस्त नक्षत्र में होगी स्थापना

12 सितंबर अनंत चतुर्दशी के लिए गणपति की मूर्तियों का विसर्जन गंगा में किया जाएगा।घरों में भी लोग गणपति की मूर्तियां स्थापित करेंगे। गणपति की मूर्तियां बनाने का काम कनखल और ज्वालापुर क्षेत्र में शुरू हो चुका है। व्रज योग और  हस्त नक्षत्र में गणपति की स्थापना होगी। अगले दिन से दस दिवसीय क्षमावाणी पर्व प्रारंभ हो जाएगा।

13 सितंबर से 16 दिन चलने वाले महालय श्राद्ध प्रारंभ हो रहे हैं। चतुर्दशी को पूर्णिमा के दिन प्रतिपदा के श्राद्ध होंगे। पितरों का विसर्जन 26 सितंबर को किया जाएगा। श्राद्ध समापन पर भगवती दुर्गा के शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो जाएंगे। 
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