फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गणेश चतुर्थी 2019: आज घर-घर विराजेंगे विघ्नहर्ता, सालों बाद बने हैं सौभाग्य प्रदान करने वाले संयोग

Mon, 02 Sep 2019 12:51 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal विनोद चमोली, अमर उजाला, चंबा (टिहरी)
विज्ञापन
देहरादून में भी गणेश चतुर्थी की धूम - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

ज्ञान, बुद्धि और सौभाग्य के प्रतीक भगवान गणेश का जन्मोत्सव भाद्रपद मास की चतुर्थी यानी आज मनाया जा रहा है। इस बार सालों बाद हस्त और चित्रा नक्षत्र के संयोग में भगवान श्रीगणेश की पूजा-अर्चना सुख-समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करने वाली होगी। इसके साथ ही 10 दिनों तक श्रीगणेश की घर-घर में आराधना की जाएगी।

विज्ञापन


मान्यता है कि भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश का जन्म हुआ था। गणेश चतुर्थी का उत्सव 10 दिनों के बाद यानी अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है। यह दिन गणेश विसर्जन के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल के दौरान हुआ था। इसीलिए मध्याह्न का समय गणेश पूजा के लिए उपयुक्त माना जाता है।
 

Trending Videos

आज पूरे दिन-भर रवि योग भी

इस साल चतुर्थी तिथि यानी आज 2 सितंबर को सुबह चार बजकर 57 मिनट पर शुरू होकर रात को 1 बजकर 54 मिनट तक रहेगी। आज सूर्योदय से सुबह 8 बजकर 32 मिनट बजे तक हस्त नक्षत्र और इसके बाद मंगलकारी चित्रा नक्षत्र रहा। इसके साथ ही सुबह 8.33 से पूरे दिन-भर रवि योग भी रहेगा।

आज सुबह 11.04 से दोपहर 1.37 बजे तक का समय गणेश पूजन के लिए श्रेष्ठ है। उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व अध्यक्ष पं. उदय शंकर भट्ट ने पर्यावरण संरक्षण के लिए ईको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं को घर में स्थापित करने की अपील की है।

क्यों की जाती है सबसे पहले गणेश जी की पूजा 

भारतीय संस्कृति में कोई भी मंगल कार्य करने से पूर्व विघ्न विनाशक गणेश जी के नाम का स्मरण किया जाता है। इसके पीछे प्रचलित कथा है कि एक बार समस्त देवताओं में यह जिज्ञासा उत्पन्न हुई कि धरती पर सबसे पहले किस देवी-देवता की पूजा होनी चाहिए।

जिस पर एक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया कि जो देवी-देवता अपने वाहन पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा करके सर्वप्रथम वापस लौटेगा वह ही प्रथम पूजा का अधिकारी होगा। फिर गणेशजी ने पृथ्वी की परिक्रमा करने के बजाए अपने माता-पिता की परिक्रमा करने लगे। उन्होंने अपने माता-पिता की प्रदक्षिणा करके ही अग्रपूजा का अधिकार प्राप्त किया।

श्रीगणेश के सिर पर लगाया गया हाथी का मस्तक

गणों का जो स्वामी है, उसे गणपति कहते हैं। शास्त्रों में कथा आती है कि मां पार्वती ने अपने योगबल से एक बालक को प्रकट किया और आज्ञा दी कि मेरी आज्ञा के बिना कोई भी कक्ष के भीतर प्रवेश न करे। इतने में शिवजी आए, तब बालक ने उन्हें प्रवेश करने से मना कर दिया। जिस पर शिवजी ने बालक का शिरोच्छेद कर दिया। बाद में मां पार्वती से सारी हकीकत जानकर उस बालक के सिर पर हाथी का मस्तक स्थापित कर बालक को जीवित कर दिया।

गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से मिथ्या दोष अथवा मिथ्या कलंक लगता है। भगवान गणेश ने चंद्र देव को श्राप दिया था कि जो व्यक्ति भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन करेगा, वह मिथ्या दोष से अभिशापित हो जाएगा। पौराणिक गाथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण पर स्यमन्तक नाम की कीमती मणि चोरी करने का झूठा आरोप लगा था।
विज्ञापन

गणपति की शोभायात्रा का फूलों से स्वागत

देहरादून के रघुनाथ मंदिर समिति की ओर से क्लेमेंटटाउन में श्रीगणेश की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस अवसर पर शिव-पार्वती की झांकी आकर्षण का केंद्र रहीं। जगह-जगह फूलों की वर्षा से शोभायात्रा का स्वागत किया। इस दौरान भक्तों ने गणपति बप्पा मोरिया.. के जयकारे लगाए। यात्रा का शुभारंभ रघुनाथ मंदिर से हुआ। इस दौरान विधायक विनोद चमोली ने मत्था टेका। उन्होंने गणेश चतुर्थी की सभी को शुभकामनाएं देते हुए क्षेत्रवासियों को हिमालय बचाओ की शपथ दिलाई।

यात्रा में नंदा देवी माता की सुंदर झांकी शिवजी की बरात एवं राधा-कृष्ण की झांकियों ने लोगों का मन मोहा। इस अवसर पर छावनी परिषद उपाध्यक्ष सुनील कुमार, समिति के अध्यक्ष दिनेश लाल, महासचिव मोहन जोशी, महेश पांडे, विनोद कनौजिया, वीरसेन कश्यप, महेश गोयल, ग्राम प्रधान राजेश परमार, ग्राम प्रधान मंगू, विजयपाल, सुभाष धस्माना आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें