इसके बाद महात्मा गांधी और स्वामी श्रद्धानंद का गहरा संबंध बन गया। उसके बाद महात्मा गांधी मार्च 1916 में फिर गुरुकुल में आए और स्वामी श्रद्धानंद से कई राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की।
10 साल बाद मार्च 1926 को महात्मा गांधी गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के रजत जयंती समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। महात्मा गांधी और गुरुकुल कांगड़ी के संस्थापक स्वामी श्रद्धानंद राष्ट्रीय मुद्दों पर पत्राचार से चर्चा भी की। उनके कई पत्र आज भी गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के संग्रहालय में संरक्षित किए गए हैं।
गुरुकुल के संस्थापक स्वामी श्रद्धानंद ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को पहली बार महात्मा कहकर संबोधित किया था। इसके बाद मोहन दास कर्मचंद गांधी को विधिवत रूप से महात्मा की उपाधि से अलंकृत भी किया गया।
- प्रो. रूप किशोर शास्त्री, कुलपति, गुरुकुल कांगड़ी विवि