समाजसेवी मदन मोहन शर्मा ने बताया कि गांधी जी का आजादी का मकसद समाज के अंतिम व्यक्ति का विकास था। जब वे मसूरी आए तो देखा कि यहां भी गरीबों और पिछड़ों की वही दशा है।
माल रोड पर किसी को चलने नहीं दिया जाता। इस पर उन्होंने मसूरी में एक ऐसी संस्था बनाने के लिए कहा जिसके जरिये गरीब और पिछड़े अपनी सभा और बात कर सकें।
इसके बाद गांधीवादी विचारक पीसी हरी और तनखा ने नगर में एक पुराने भवन को किराये पर लिया, जिसे बाद में उन्होंने खरीद लिया और वहां गांधी निवास सोसाइटी बनाई।
यह सोसाइटी आज भी चल रही है। सोसाइटी की ओर से एक प्राइमरी स्कूल खोला गया है, जहां गरीबों और हरिजनों के बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दी जाती है।
बाद में महात्मा योगेश्वर की प्रेरणा से सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय की स्थापना की गई, जो आज भी चल रहा है।
स्वामी जीएस मनचंदा ने बताया कि बचपन में महात्मा गांधी के मसूरी आने पर बड़ी संख्या में लोग उन्हें देखने पहुंचते थे। लाइब्रेरी स्थित दुकानदार 85 वर्षीय सेवाराम ने बताया कि सिल्वर्टन से बिड़ला हाउस आने-जाने के दौरान बड़ी संख्या में लोग गांधी जी को देखने के लिए जुट जाते थे।