मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गैरसैंण को राजधानी बनाए जाने के मामले में गोलमोल जवाब दिया, लेकिन उनके इशारे में यह बात भी साफ थी कि गैरसैंण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लाडपुर रिंग रोड स्थित खाद्य आयुक्त कार्यालय के शिलान्यास के मौके पर मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा कि जिस भावना के साथ उत्तराखंड को राज्य बनाने के लिए संघर्ष किया गया था उसी भावना के साथ गैरसैंण को प्रदेश के विकास के मॉडल के रूप में तैयार किया जा रहा है।
एकदम से नहीं हो सकता निर्णय
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक उद्देश्य के साथ विधानभवन का शिलान्यास गैरसैण में किया गया है। हम एक रोडमैप बनाकर उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। एकदम से कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता है। इन सब बातों का तब तक कोई मतलब नहीं है जब तक गैरसैंण में सारी अवस्थापना सुविधाओं का विकास नहीं कर देते हैं।
राज्य के हित में विकास पर फोकस किया जाना चाहिए। राज्य के विकास का मापदंड गैरसैंण है और रहेगा। हम केवल वहां विधानभवन ही नहीं बना रहे हैं, वहां सड़कों के निर्माण, आजीविका संसाधनों के विकास के लिए भी काम कर रहे हैं।
शिक्षा के मॉडल के रूप में भी गैरसैंण पर काम कर रहे हैं। हम चाल-खाल के जरिये पर्वतीय क्षेत्रों में जल संवर्धन, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर भी काम कर रहे हैं। गैरसैंण में अवस्थापना विकास निगम बनाया है। स्मार्ट टाउन के मॉडल के तौर पर भराड़ीसैंण में काम हो रहा है। इसके लिए यूहुडा संस्था खड़ी की गई है।