प्रतिकूल हालातों और विपक्ष के हंगामे के बीच विधानसभा का सत्र दो दिन में ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। सरकार ने 13 दिसंबर तक सत्र चलाने का कार्यक्रम बनाया था, लेकिन सत्र संपन्न होने से पूर्व सदन में विपक्ष ने हमलावर रुख अख्तियार करते हुए किडनी कांड, महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर वेल में जमकर हंगामा काटा और सदन से वॉकआउट किया।
विपक्ष ने एनएच घोटाले, केदारनाथ पुनर्निर्माण जैसे मुद्दों के जरिये भी सरकार की घेराबंदी के प्रयास किए। सरकार ने भी इनका मुखर होकर जवाब दिया और रणनीतिक तरीके से अपना कामकाज निपटाया।
सरकार ने सदन में उत्तराखंड विनियोग (2017-18 का प्रथम अनुपूरक) विधेयक, आधार अधिनियम, उत्तराखंड दुकान और स्थापन (रोजगार विनियमन सेवा-शर्त) विधेयक समेत कुल 12 विधेयकों, जिनमें संशोधित विधेयक भी शामिल हैं, को ध्वनिमत से पारित कराया। एक विधेयक सदन पटल पर पेश हुआ।
स्थानांतरण विधेयक और आवासीय विवि संशोधन विधेयक को सरकार बृहस्पतिवार को ही मंजूरी दे चुकी थी। संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत ने जब सदन स्थगित करने का प्रस्ताव किया तो विधायक प्रीतम पंवार ने इससे असहमति प्रकट की।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश को भी कहना पड़ा कि सत्र कराने का समय उपयुक्त नहीं था, जिसके जवाब में नेता सदन त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि पिछली सरकार ने वादा किया था, जिसे हमने निभाया है।
विपक्ष ने किडनी कांड पर सरकार को घेरा
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सुबह ही मिल गए थे समापन के संकेत
विपक्ष से लेकर सत्ता पक्ष के कतिपय सदस्य भराड़ीसैंण की परिस्थितियों को लेकर असहज थे और उन्होंने सुबह संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत से दिक्कतों के संबंध में भी मुलाकात की थी। शुक्रवार को सत्र के समापन से पहले सरकार ने देर शाम तक अपना कामकाज निपटाया। शाम करीब छह बजे संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन में मंजूरी दे दी।
विपक्ष ने किडनी कांड पर सरकार को घेरा
सत्र के दूसरे दिन विपक्ष एकजुट और हमलावर नजर आया। उसने रणनीतिक तरीके से किडनी कांड के मुद्दे पर सरकार को घेरा। इस पर खूब हंगामा भी हुआ और उसने सदन से वॉकआउट कर दिया। महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर विपक्ष के तेवर खासे आक्रामक रहे। कानून व्यवस्था के मुद्दे पर भी सदन सरकार के तर्कों से सहमत नहीं दिखा। उपनेता प्रतिपक्ष करन माहरा ने सदन को जानकारी दी कि उनकी पत्नी द्वारा संचालित की जा रही स्कूल बसों की पुलिस कर्मी चेकिंग कर रहे हैं। इस पर नेता प्रतिपक्ष ने पीठ से मामले पर संज्ञान लेने की मांग की।
नौ घंटे 45 मिनट चला सदन
विधानसभा सत्र की दो दिवसीय कार्यवाही नौ घंटे 45 मिनट तक चली। पहले दिन सत्र चार घंटे 45 मिनट तक चला। दूसरे दिन सत्र की कार्यवाही 5 घंटे 30 मिनट तक चली। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने बताया कि सत्र में कुल 12 विधेयक पास हुए। एक विधेयक सदन के पटल पर रखा गया। कुल 1090 प्रश्न प्राप्त हुए। अल्प सूचित रूप से स्वीकार 18 प्रश्नों में से चार के उत्तर दिए गए। आतारांकित रूप से स्वीकार 160 में से 33, तारांकित रूप से स्वीकार 832 उत्तरित 193, विचाराधीन 40 और अस्वीकार 40 प्रश्न किए गए।
पूरे नहीं हुए राजधानी के अरमान, मिलेगा शोध संस्थान
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पूरे नहीं हुए राजधानी के अरमान, मिलेगा शोध संस्थान
भराड़ीसैंण में पहुंची सरकार से इस बार राजधानी पर निर्णय की उम्मीद की जा रही थी, मगर सरकार ने राजधानी के अरमान तो पूरे नहीं किए अलबत्ता भराड़ीसैंण की अवस्थापना सुविधाओं के मद्देनजर यहां एक संसदीय एवं विधायी पर अंतरराष्ट्रीय शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना के लिए सहमति प्रकट की गई। भाजपा विधायक ऋतु खंडूड़ी ने व्यवस्था के प्रश्न के जरिये इस मांग को उठाया, जिसे सदन ने स्वीकृति प्रदान की। पूर्व सरकार में भी इस तरह का शोध संस्थान खोलने का निर्णय लिया गया था।
पलायन और पर्यावरण पर सात सदस्यीय समितियां
सदन में पलायन और पर्यावरण से निपटने को लेकर सात सदस्यीय समितियों का गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सदन ने सदस्यों के चयन के लिए स्पीकर को अधिकृत किया। पलायन पर गठित समिति आर्थिक, सामाजिक एवं जनसंख्या पर आधारित कारणों का अध्ययन करेगी। दूसरी समिति पर्यावरण संरक्षण का अध्ययन एवं अनुश्रवण करेगी।
मैं विपरीत परिस्थितियों में सत्र संचालन पर स्पीकर, सदस्यों, नेता प्रतिपक्ष का आभार व्यक्त करता हूं। नेता प्रतिपक्ष ने सदन आहूत करने को लेकर जो बातें कहीं, पिछली सरकार ने जो वादा किया था, हमने उस वादे को निभाने का काम किया। स्वीकारता हूं कि थोड़ी दिक्कतें तो आई होंगी।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री
सत्र कराने के लिए यह समय उपयुक्त नहीं था। सत्र में लगे लोगों को कोई सुविधाएं नहीं मिली। पुलिसकर्मी ठंड में ठिठुरते रहे। अच्छा होता सरकार पांच दिन सत्र चलाती। शनिवार को प्रश्नकाल करती। इसके बावजूद हम जनता के ज्वलंत मुद्दों को उठाने में सफल रहे। सरकार के पास हमारे सवालों का जवाब नहीं था।
- डॉ. इंदिरा हृदयेश नेता प्रतिपक्ष