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Joshimath In Danger: अगर ये काम नहीं किया तो धंस जाएगा जोशीमठ, वैज्ञानिकों के सर्वेक्षण में आई बात सामने

Thu, 30 Jun 2022 06:25 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून

सार

गढ़वाल विवि के प्रो. एसपी सती, बीएचयू की प्रोफेसर शुभ्रा शर्मा, चारधाम हाई पावर कमेटी के सदस्य नवीन जुयाल की टीम ने जोशीमठ का अध्ययन किया है। इस अध्ययन में ग्लेशियोलॉजी, भूगर्भ विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, पर्यावरणविदों की टीम भी शामिल हुई।
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जोशीमठ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अगर शहरीकरण, चारधाम ऑल वेदर रोड और जल विद्युत परियोजना के निर्माण कार्यों को विशेषज्ञता के साथ न किया गया तो आने वाले समय में जोशीमठ धंस जाएगा। गढ़वाल विवि के वैज्ञानिकों के अध्ययन में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। उन्होंने स्थानीय लोगों के अनुरोध पर सर्वे करते हुए यह रिपोर्ट दी है।

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गढ़वाल विवि के प्रो. एसपी सती, बीएचयू की प्रोफेसर शुभ्रा शर्मा, चारधाम हाई पावर कमेटी के सदस्य नवीन जुयाल की टीम ने जोशीमठ का अध्ययन किया है। इस अध्ययन में ग्लेशियोलॉजी, भूगर्भ विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, पर्यावरणविदों की टीम भी शामिल हुई। सर्वेक्षण में वैज्ञानिकों ने पाया कि जोशीमठ के आसपास के इलाकों में तेजी से शहरीकरण बढ़ने के साथ ही निर्माण कार्य हो रहे हैं। रैणी आपदा के बाद यहां पहले से काफी भूगर्भीय हलचल है। ऊपर से चारधाम यात्रा मार्ग का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।

वैज्ञानिकों ने कहा है कि ऑल वेदर रोड में हेलांग और मारवाड़ी के बीच के 20 किलोमीटर हिस्से में तेजी से काम हो रहा है लेकिन मानकों का ख्याल नहीं रखा जा रहा। यहां चारधाम सड़क का निर्माण विशेष उपचार के बाद ही होना चाहिए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना से भी इस इलाके को खतरा है। इससे पहले 1960 में तत्कालीन यूपी सरकार ने इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए शहर के खतरे को भांपने के लिए वैज्ञानिकों की एक समिति गठित की थी। इस समिति की सिफारिशों के आधार पर यह भी माना गया था कि इस क्षेत्र में निर्माण कार्य आसान नहीं हैं। वैज्ञानिकों ने रिपोर्ट में कहा है कि तत्काल यहां विशेष ध्यान देते हुए नियंत्रित निर्माण होने चाहिए, नहीं तो आने वाले समय में जोशीमठ धीरे-धीरे धंसने लगेगा।
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बड़े बोल्डर मुसीबत, घरों में आ रहीं दरारें
वैज्ञानिकों की टीम का कहना है कि कई जगहों पर काफी सख्त पत्थर हैं, जिन्हें गलत तरीके से तोड़कर निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं। लोगों के घरों में दरारें आने लगी हैं। मलबा, गलत तरीके से खुदाई और पत्थर हटाने की प्रक्रिया जोशीमठ के अस्तित्व पर भारी साबित हो रही है।

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