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Dehradun News: तीन जेसीबी से हटे पाइप, जलधारा की पूरी बहाली बाकी

Wed, 28 Oct 2026 06:32 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
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- राष्ट्रीय राजमार्ग के कारण खेतों तक पहुंच बाधित होने का आरोप, संयुक्त निरीक्षण की मांग
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- तीन जेसीबी से हटाए गए आरसीसी पाइप, फिर भी जलधारा की पूरी बहाली बाकी

संवाद न्यूज एजेंसी
विकासनगर। तहसील क्षेत्र के जाटोवाला, माजरी और घमोला सीमा क्षेत्र में प्राकृतिक जलधारा (फंदे) की मूल चौड़ाई बहाल करने और राष्ट्रीय राजमार्ग पर किसानों को खेतों तक पहुंचने के लिए सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। ग्रामीणों की शिकायत पर बुधवार को माजरी में तहसील प्रशासन की राजस्व टीम ने तीन जेसीबी की मदद से फंदे में डाले गए आरसीसी ह्यूम पाइप हटा दिए। हालांकि, स्थानीय किसानों का कहना है कि जलधारा का प्राकृतिक स्वरूप अभी तक पूरी तरह बहाल नहीं हुआ है और न ही उनके सुरक्षित आवागमन का कोई स्थायी समाधान निकला है।
ग्रामीणों के अनुसार, प्राकृतिक फंदे के उद्गम स्थल से लेकर आसन नदी में इसके संगम तक, उसकी मूल चौड़ाई, दिशा और जलप्रवाह को राजस्व अभिलेखों के अनुरूप बहाल किया जाना जरूरी है। उनका मानना है कि केवल पाइप हटाने से इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। इसके लिए जलधारा के पूरे मार्ग का सीमांकन करना और मौके पर राजस्व अभिलेखों का सत्यापन होना आवश्यक है।
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स्थानीय किसानों का आरोप है कि राष्ट्रीय राजमार्ग-07 की परियोजना के चलते जाटोवाला-माजरी सीमा क्षेत्र में उनके पारंपरिक कृषि रास्ते की कनेक्टिविटी पूरी तरह बाधित हो गई है। जाटोवाला क्षेत्र में किसानों के आवागमन के लिए न तो कोई सुरक्षित रास्ता है और न ही नीचे से गुजरने की व्यवस्था स्पष्ट की गई है। किसानों ने राजस्व अभिलेखों का हवाला देते हुए बताया कि जाटोवाला के खसरा संख्या 149 और 151 में वर्ग छह-दो की भूमि दर्ज है। ऐसे में प्रशासन को किसानों के रास्तों की स्थिति जल्द स्पष्ट करनी चाहिए।
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राजस्व और सड़क के नक्शे का हो संयुक्त मिलान
आरटीआई कार्यकर्ता जुबैर ने इस पूरे मामले में तहसील प्रशासन और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से संयुक्त निरीक्षण करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राजस्व नक्शे का स्वीकृत सड़क रूपरेखा और भूमि अधिग्रहण नक्शे के साथ मिलान किया जाए। प्राकृतिक जलधारा, सिंचाई गूलों और सरकारी भूमि पर जलप्रवाह या सार्वजनिक उपयोग में बाधा डालने वाले किसी भी निर्माण की जांच कर नियमानुसार सख्त कार्रवाई हो। साथ ही, फंदे की पूरी चौड़ाई बहाल करने और किसानों के सुरक्षित पारगमन पर प्रशासन स्पष्ट लिखित निर्णय जारी कर अपनी कार्रवाई रिपोर्ट उपलब्ध कराए।
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