फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राष्ट्रपति भवन में ग्रीनरी की सेहत सुधारेगा एफआरआई

Thu, 02 Mar 2017 06:15 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
FRI
विज्ञापन
वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) राष्ट्रपति भवन में हरियाली की सेहत सुधारेगा और उसकी रखवाली करेगा।
विज्ञापन


देश के पूर्व राष्ट्रपतियों के नाम बनी बीठियों की स्थिति दुरुस्त करने के साथ राष्ट्रपति भवन में पुराने पेड़ों की सेहत की जांच की जाएगी। इन पेड़ों को बीमारियों के लिहाज से इलाज मुहैया कराने के साथ ही इन्हें बदला भी जाएगा। एफआरआई के विज्ञानी बताएंगे कि मिट्टी की मौजूदा स्थिति में कौन से वृक्ष राष्ट्रपति भवन की शोभा बढ़ाएंगे।

रायसीना हिल्स स्थित राष्ट्रपति भवन के तीन सौ एकड़ में फैले गार्डन के पेड़ों की सेहत के मूल्यांकन के संबंध में राष्ट्रपति भवन की ओर से वन अनुसंधान संस्थान को प्रस्ताव भेजा गया था। इस पर संस्थान के विज्ञानी राष्ट्रपति भवन के गार्डन के पेड़ों के मूल्यांकन के मद्देनजर पहले चरण का परीक्षण कर चुके हैं। दूसरे चरण में विज्ञानियों की टीम फिर राष्ट्रपति भवन गई है। देश में अब तक जितने राष्ट्रपति हुए हैं, उनके नाम से राष्ट्रपति भवन में बीठी (क्यारी) बनाई गई है। वैज्ञानिक इन सभी बीठियों का अध्ययन कर रहे हैं। इनमें विशिष्ट प्रकार के पेड़ लगाए गए हैं।
विज्ञापन


पूर्व राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद, राधाकृष्णन, फखरुद्दीन अली अहमद आदि के बीठी में यूकेलिप्टस, कैशिया, पापड़ी, शीशम, पिलखन, टीक आदि के पेड़ लगे हैं। विज्ञानी इन पेड़ों की उम्र का पता लगाएंगे। इसके साथ ही पेड़ों की उम्र के लिहाज से इनकी सेहत भी देखेंगे। अगर कोई पेड़ खोखला होकर खराब हो गया है तो उसे बदला जाएगा। पौधरोपण के पहले मिट्टी की जांच की जाएगी। पेड़ों के सैंपल की पैथोलॉजी जांच भी की जाएगी। राष्ट्रपति भवन में 160 से अधिक प्रजातियों की पेड़ लगे हैं। ये वर्ष 1938 में लगाए गए थे। इनमें दिल्ली क्षेत्र के पेड़ों की 24 विशिष्ट प्रजातियां हैं।  
विज्ञापन


राष्ट्रपति भवन के गार्डन के पेड़ों की सेहत की जांच और रख-रखाव एफआरआई कर रहा है। टीम दूसरी बार जांच के लिए दिल्ली गई है। पेड़ों में फंगल इन्फेक्शन आदि बीमारियां हो जाती हैं। पुराने पेड़ खोखले हो जाते हैं। सबकी जांच की जाएगी। इसके साथ ही मिट्टी की भी जांच होगी।
- डॉ. सविता, निदेशक, वन अनुसंधान संस्थान
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें