चाय बागान में स्मार्ट सिटी बनने से हरियाली और पर्यावरण को नुकसान का अंदेशा जताए जाने के मुद्दे पर विरोध तेज होने के बाद उत्तराखंड सरकार ने एफआरआई की मदद लेने का फैसला किया है।
बतौर कंसलटेंट एफआरआई के विशेषज्ञ बताएंगे कि चाय बागान में हरियाली बचाते हुए कैसे स्मार्ट सिटी बनाई जा सकती है। इस पर एफआरआई अधिकारियों से सोमवार को फाइनल दौर की वार्ता होगी। बड़ी संख्या में लोग चाय बागान में स्मार्ट सिटी बसाने से हरियाली के खत्म होने का तर्क देकर विरोध कर रहे हैं।
विरोध करने वालों का कहना है कि शहर के आसपास इतनी हरियाली और स्वच्छ पर्यावरण कहीं और नहीं है। ऐसे में यहां स्मार्ट सिटी बनने से पर्यावरण को खासा नुकसान पहुंचेगा। इस मुद्दे पर भविष्य में विरोध के स्वर बढ़ने की आशंका को देखते हुए सरकार ने अपनी तैयारी तेज कर दी है।
स्मार्ट सिटी के नोडल अधिकारी आर मीनाक्षी सुंदरम के अनुसार चाय बागान में हरियाली, पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं को बचाए रखते हुए निर्माण कैसे हो, इसके संबंध में एफआरआई की मदद ली जाएगी।
एफआरआई के विशेषज्ञ बताएंगे कि कैसे वहां पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे। स्मार्ट सिटी निर्माण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण व संवर्द्धन के लिए क्या किया जाए, इसके संबंध में भी विशेषज्ञ अपनी राय देंगे।
एससीपी का मास्टर प्लान मैप तैयार
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट (एससीपी) पर राज्य सरकार बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। 15 दिसंबर को केंद्र को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट जमा कराने की आखिरी तारीख है। उससे पहले राज्य सरकार सभी तैयारियां पूरी कर लेना चाहती है। इसी के तहत रविवार को प्रोजेक्ट के मास्टर प्लान का मैप भी तैयार कर लिया गया। अगले कुछ दिनों में यह मैप सार्वजनिक किया जाएगा।
स्मार्ट सिटी के निर्माण से वन एवं पर्यावरण को कैसे कम से कम नुकसान हो, इसके लिए एफआरआई को कसंलटेंसी नियुक्त किया जा रहा है। स्मार्ट सिटी में हरियाली बनी रहे और पर्यावरण बेहतर हो, इस पर भी कंसलटेंसी काम करेगी। इस संबंध में सोमवार को एफआरआई अधिकारियों से वार्ता होगी।
- आर मीनाक्षी सुंदरम, नोडल अधिकारी, स्मार्ट सिटी