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90 साल की उम्र में भी इनके दिल में बसा है देशभक्ति का जोश

Mon, 15 Aug 2016 12:31 PM IST
दीपक मिश्रा/ अमर उजाला, रुड़की
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स्वतंत्रता सेनानी सत्यवती सिन्हा - फोटो : amar ujala
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90 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी सत्यवती सिन्हा भले ही शरीर से वृद्ध हो चुकी हों। लेकिन देशभक्ति आज भी उनकी रग-रग में समाई है। देश का नाम आते ही उनकी लडख़ड़ाती जुबान एकाएक बुलंद अवाज में देशभक्ति गीत सुनाने लगती हैं।
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'आओ बच्चों तुम्हे दिखाएं झांकी हिन्दुस्तान की' जैसे देशभक्ति गीत सुनाकर उनकी आंखों में चमक आ जाती है और चेहरा खिल उठता है। रुड़की के बीटी गंज निवासी सत्यवती सिन्हा ने देश की आजादी के लिए उन्होंने अंग्रेजों से लोहा लिया।

अपने पति के साथ मिलकर उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ देश की आजादी के लिए जो लड़ाई शुरू की, उसे देश के आजाद होने तक जारी रखा। वह कई बार जेल गई और अंग्रेजों की यातनाएं दी, उन्हें भूखा प्यासा रखा। लेकिन उनकी देशभक्ति के आगे यह सब कुछ बेअसर रहा।
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स्वतंत्रता सेनानी सत्यवती सिन्हा का विवाह 16 वर्ष की आयु में आठ मार्च 1942 को स्वतंत्रता सेनानी जगदीश नारायण सिन्हा के साथ हुआ। जगदीश नारायण सिन्हा उस समय देश की आजादी के लिए लड़ रहे थे। पति के साथ ही वह भी स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़ी।

शादी के मात्र पांच माह बाद ही उन्होंने भी अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल बजा दिया। नौ सितंबर 1942 को उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ जुलूस निकाला और इस जुलूस के जरिये उन्होंने लोगों को देशभक्ति के लिए प्रेरित किया। जब जुलूस की जानकारी अंग्रेजों को लगी तो उन्होंने सत्यवती सिन्हा को गिरफ्तार कर लिया। 

हालांकि कम उम्र को देखते हुए उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। लेकिन उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई जारी रखी। जिसके चलते सत्यवती सिन्हा के गिरफ्तारी वारंट जारी हो गए। लेकिन उन्होंने इसकी परवाह किए बिना गांव-गांव जाकर छिप-छिपाकर लोगों को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ गांधी जी के साथ आने के लिए प्रेरित किया।
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जेल
अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ पर्चे बांटे। 10 अप्रैल 1943 को मेरठ में सीआईडी सुरपरिटेंडेंट पदम सिंह ने घेराबंदी कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। 10 दिन तक बरेली की कोतवाली में उनसे पूछताछ की गई। इसके बाद बरेली जेल भेज दिया गया। जेल के भीतर भी उन्होंने देश की आजादी के लिए संघर्ष जारी रखा। वहां बंद कैदियों को उन्होंने आजादी के लिए लडने के लिए प्रेरित किया।

जेल से छूटने के बाद वह फिर से आजादी की लड़ाई में कूद पड़ी। इसके बाद वह कई बार गिरफ्तार हुई और रिहा हुई। सत्यवती सिन्हा ने बताया कि उन्होंने जो सपना देखा था वह 15 अगस्त 1947 को पूरा हुआ। देश आजाद हो गया। उस समय वह इलाहाबाद में थी। वह वर्तमान में अपनी बड़ी बेटी किरण कौशिक के यहां पर रहती हैं। वृद्ध होने की वजह से अब उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है।  

पति को दिया वचन आज तक निभा रही सत्यवती
स्वतंत्रता सेनानी सत्यवती सिन्हा का जब विवाह हुआ था उस समय उनकी उम्र महज 16 साल की थी। पति जगदीश नारायण सिन्हा देश की आजादी के लिए पूरी तरह समर्पित थे। उन्होंने शादी के समय अपनी पत्नी सत्यवती सिन्हा से वचन लिया था कि वह खदर ही पहनेगी।

सत्यवती सिन्हा की बड़ी बेटी किरण कौशिक बताती है कि उनकी मम्मी आज भी अपना वचन निभा रही हैं। वह अब भी खदर की साड़ी ही पहनती हैं। किरण कौशिक एक प्ले स्कूल चलाती हैं। उनका कहना है कि उनकी मम्मी जब भी स्कूल में आती है तो हमेशा बच्चों को देशभक्ति से जुड़ी बातें बताती है और देशभक्ति से जुड़े गाने सुनाती हैं। 
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