90 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी सत्यवती सिन्हा भले ही शरीर से वृद्ध हो चुकी हों। लेकिन देशभक्ति आज भी उनकी रग-रग में समाई है। देश का नाम आते ही उनकी लडख़ड़ाती जुबान एकाएक बुलंद अवाज में देशभक्ति गीत सुनाने लगती हैं।
'आओ बच्चों तुम्हे दिखाएं झांकी हिन्दुस्तान की' जैसे देशभक्ति गीत सुनाकर उनकी आंखों में चमक आ जाती है और चेहरा खिल उठता है। रुड़की के बीटी गंज निवासी सत्यवती सिन्हा ने देश की आजादी के लिए उन्होंने अंग्रेजों से लोहा लिया।
अपने पति के साथ मिलकर उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ देश की आजादी के लिए जो लड़ाई शुरू की, उसे देश के आजाद होने तक जारी रखा। वह कई बार जेल गई और अंग्रेजों की यातनाएं दी, उन्हें भूखा प्यासा रखा। लेकिन उनकी देशभक्ति के आगे यह सब कुछ बेअसर रहा।
स्वतंत्रता सेनानी सत्यवती सिन्हा का विवाह 16 वर्ष की आयु में आठ मार्च 1942 को स्वतंत्रता सेनानी जगदीश नारायण सिन्हा के साथ हुआ। जगदीश नारायण सिन्हा उस समय देश की आजादी के लिए लड़ रहे थे। पति के साथ ही वह भी स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़ी।
शादी के मात्र पांच माह बाद ही उन्होंने भी अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल बजा दिया। नौ सितंबर 1942 को उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ जुलूस निकाला और इस जुलूस के जरिये उन्होंने लोगों को देशभक्ति के लिए प्रेरित किया। जब जुलूस की जानकारी अंग्रेजों को लगी तो उन्होंने सत्यवती सिन्हा को गिरफ्तार कर लिया।
हालांकि कम उम्र को देखते हुए उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। लेकिन उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई जारी रखी। जिसके चलते सत्यवती सिन्हा के गिरफ्तारी वारंट जारी हो गए। लेकिन उन्होंने इसकी परवाह किए बिना गांव-गांव जाकर छिप-छिपाकर लोगों को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ गांधी जी के साथ आने के लिए प्रेरित किया।