डॉ. सरोज नैथानी ने बताया कि किसी का नाम योजना में शामिल है या नहीं, यह जानने के लिए उन्हें अपना आधार कार्ड, राशन कार्ड व मोबाइल नंबर लेकर सीएमओ कार्यालय, जिला अस्पताल, सीएचसी या कामन सर्विस सेंटर में जाकर भौतिक सत्यापन कराना होगा। दस्तावेजों की जानकारी साफ्टवेयर में दर्ज होने के साथ ही लाभार्थी का नाम गोल्डन रिकार्ड में दर्ज हो जाएगा। उसके बाद ही लोगों को योजना का लाभ मिल सकेगा।
डाटा इंट्री में दून व हरिद्वार सबसे फिसड्डी
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार योजना के लिए डाटा इंट्री के मामले में बागेश्वर, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग की स्थिति बहुत अच्छी है, जबकि हरिद्वार व देहरादून की स्थिति बेहद खराब है। रुद्रप्रयाग में 98.6, पौड़ी गढ़वाल में 97.4 व बागेश्वर में 95.6 फीसदी लोगों का डाटा फीड किया जा चुका है।
अल्मोड़ा में 89.7, चमोली में 73.8, चंपावत में 84.3, नैनीताल में 60.1, पिथौरागढ़ में 85.5, टिहरी में 78.1, ऊधमसिंह नगर में 68.8 , देहरादून में 50.6 व हरिद्वार में सबसे कम 23.3 फीसदी लोगों का डाटा फीड किया गया है।
अपर निदेशक की मानें तो आयुष्मान भारत योजना का लाभ सामाजिक आर्थिक सर्वे के आधार पर चिन्हित लोगों के साथ ही मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना, यू हेल्थ कार्डधारक, सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों को भी मिलेगा। हालांकि इस संबंध में अभी कैबिनेट में फैसला लिया जाना है।
लाभार्थियों को दिया जा रहा ई-कार्ड
आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों को ई-कार्ड जारी किया जा रहा है। ई-कार्ड में क्यूआर कोड व बार कोड के जरिये लाभार्थी की सारी जानकारियां कंप्यूटर से तत्काल हासिल की जा सकेगी। योजना के तहत इलाज कराने के लिए लाभार्थी को यह ई-कार्ड दिखाना होगा।
आयुष्मान भारत योजना पर राज्य में तेजी से कार्य चल रहा है। योजना संचालित करने को लेकर ट्रस्ट का गठन करने के साथ ही निजी अस्पतालों के साथ समझौते किए जा रहे हैं। राज्य के अलावा देश के बडे़ निजी अस्पतालों ने योजना के तहत मरीजों का इलाज करने में दिलचस्पी दिखाई है। उम्मीद है कि लाभार्थियों को जल्द ही योजना का लाभ मिलेगा।
- युगल किशोर पंत, अपर सचिव स्वास्थ्य व राज्य परियोजना निदेशक, एनएचएम