देहरादून। हर्षल फाउंडेशन, दून संस्कृति और अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित तीन दिवसीय निशुल्क दिव्यांग सहायता शिविर का 2780 दिव्यांगजनों ने लाभ उठाया। सोमवार को अंतिम दिन भी शिविर में लाभार्थियों का तांता लगा रहा। परामर्श के बाद जरूरतमंदों को ट्राई साइकिल, व्हीलचेयर, कृत्रिम पैर आदि बांटे गए। कई दिव्यांगजनों के समाज कल्याण विभाग के कर्मचारियों ने पेंशन फार्म भरे।
गांधी रोड स्थित अग्रवाल धर्मशाला में आयोजित शिविर के समापन समारोह में मेयर सुनील उनियाल गामा बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि दिव्यांग समाज वह वर्ग है जिसके साथ न्याय नहीं हो पाया। जबकि इनकी सेवा में ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है। इस शिविर को लगाकर हर्षल फाउंडेशन, दून संस्कृति और अमर उजाला फाउंडेशन ने समाज के प्रति अपनी स्वच्छ जिम्मेदारी निभाकर बेहद सराहनीय कार्य किया है।
विशिष्ट अतिथि विधि आयोग के अध्यक्ष राजेश टंडन ने कहा कि जब तक देश में आर्थिक, सामाजिक, न्यायिक, शैक्षिक समानता का माहौल नहीं बनेगा, आदर्श समाज का निर्माण संभव नहीं है। भाजपा महानगर अध्यक्ष विनय गोयल ने कहा कि समाज के उपेक्षित वर्ग के विकास के लिए हम सभी लोगों को आगे आना होगा। इस दौरान विधायक हरबंस कपूर ने भी अपने विचार रखे। हर्षल फाउंडेशन की अध्यक्ष रमा गोयल ने कहा कि कई दिव्यांग आर्थिक तंगी के कारण उपचार नहीं करवा पाते। ऐसे जरूरतमंदों का शिविर में उपचार कर उन्हें जरूरी उपकरण बांटे गए। इस अवसर पर ममता, ललिता, सत्यप्रकाश, धनप्रकाश, सुमन, एमएन बंसल, सेवा सिंह आदि मौजूद रहे।
लाभार्थियों की संख्या
>> पहले दिन 1100 दिव्यांगों ने उठाया लाभ
>> दूसरे दिन 1470 को किया गया लाभान्वित
>> तीसरे दिन 210 दिव्यांगजनों ने उठाया लाभ
यह मिली सुविधाएं: कृत्रिम पैर, ट्राई साइकिल, व्हील चेयर, बैसाखी, वॉकिंग स्टिक, कान की मशीन।
कृत्रिम हाथ लगाने को 20 पंजीकरण
कृत्रिम हाथ लगाने के लिए तीन दिन में 20 दिव्यांगजनों ने पंजीकरण कराए। निशक्तजन सेवा संस्था के अमृत लाल ने बताया कि पंजीकरण कराने वालों को जल्द कृत्रिम हाथ लगाए जाएंगे। कृत्रिम हाथ की दो उंगलियां मूवमेंट भी करेंगी। इस हाथ को लगाने से व्यक्ति दुपहिया वाहन चला सकेंगे। दैनिक जीवन के अन्य कार्य करने में भी आसानी होगी।
30 साल बाद पैरों पर खड़े हुए कुंदन
पानीपत निवासी कुंदन लाल 30 साल बाद दो पैरों पर खड़े हुए तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। शिविर में कुंदन को एक कृत्रिम पैर लगाया गया। उसके बाद वह चलकर घर लौटे। 64 वर्षीय कुंदन ने बताया कि 34 साल की उम्र में उसने अपना एक पैर गंवा दिया था। तब से वह ट्राई साइकिल या बैसाखी की मदद से जिंदगी जी रहे थे। वह सालों से खुद के पैरों पर खड़े होने का सपना देख रहे थे, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण कृत्रिम पैर लगवाने में समर्थ नहीं थे। आज उनका सपना पूरा हो गया है। भले ही उनका एक पैर कृत्रिम लगा है, लेकिन वह आम व्यक्तियों की भांति चल सकते हैं। इसके अलावा नैनीताल निवासी बिरेंद्र सिंह (30), अल्मोड़ा निवासी महेश राम (52) समेत कई अन्य लोगों को भी कृत्रिम पैर लगाए गए।
योग से भी बीमारी होती है छूमंतर
दिव्यांगों के लिए योग शिविर भी आयोजित किया गया था। इसमें बताया गया कि योग से भी दिव्यांगों की शारीरिक परेशानी दूर की जा सकती है। इसके लिए दिव्यांगों की उनकी शारीरिक समस्या के अनुसार योग बताया गया।
पेंशन के लिए 300 आवेदन
समाज कल्याण विभाग की ओर से दिव्यांगों को पेंशन योजना के बारे में भी जानकारी दी। विभाग के क्लर्क विक्रांत चौहान ने पात्र दिव्यांगों को पेंशन का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने मौके पर कई दिव्यांगों से आवेदन फार्म भरवाए। साथ ही कई कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी।
कौशल विकास से बदलेंगे हालात
कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग की ओर से भी स्टॉल लगाया गया था। इसमें दिव्यांगों को हुनर के माध्यम से जीविका यापन करने को प्रेरित किया। कहा गया कि कौशल विकास दिव्यांगों की आर्थिकी सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मेडिकल जांच भी
शिविर के अंतिम दिन 150 दिव्यांगों ने स्वास्थ्य शिविर में जांच कराई। ईएनटी, फिजिशियन, गायिनी के डॉक्टरों ने उन्हें आवश्यक उपचार बताया। शिविर में नैनीताल, यूएसनगर, अल्मोड़ा, चमोली, टिहरी समेत उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों से दिव्यांग पहुंचे।
इनका रहा सहयोग
एनआईईपीवीडी (राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान देहरादून) के जगदीश लखेड़ा, घनश्याम अग्रवाल, दिनेश सी गोयल, गगन ज्योत, शशिकांत, अमृत लाल, अग्रवाल चैरिटेबल ट्रस्ट, पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर सेवा दल के संजय गर्ग, सहयोग केंद्र देहरादून के अध्यक्ष रविकांत शर्मा और अन्य।