अगर आप भी ये मानते हैं कि बैंक खाते में जमा आपकी रकम सुरक्षित है तो सावधान हो जाएं। बैंक में मोटी रकम वाले खातों पर कुछ लोगों की बुरी नजर है। फर्जी चेकों के जरिये ये लोग सैकड़ों मील दूर किसी दूसरे शहर में निकालते हैं और फिर उसे किसी दूसरे खाते में जमा करा दिया जाता है।
सीबीआई और सीबीसीआईडी की जांच में साफ हुआ है कि उत्तराखंड, दिल्ली और यूपी समेत कई राज्यों में ऐसे गिरोह सक्रिय हैं। ये दो मामले तो जांच में खुले हैं, लेकिन सूत्रों की मानें तो इस तरह की ठगी के कई लोग हर रोज शिकार हो रहे हैं। हर साल इस तरह करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी की जा रही है।
पीएनबी के सहायक महाप्रबंधक नरेश कुमार के मुताबिक तकनीकी इतनी एडवांस हो चुकी है कि ऐसे लोगों को पकड़ पाना आसान नहीं है। कई बार ऐसे फर्जी चेकों का पता चल जाता है। शाखाओं के सीबीएस हो चुकी हैं। चार हजार से अधिक शाखाएं है। एक चेक कहीं जमा कराया तो दूसरा ये लोग कही और जमा कराते हैं। बैंक तो अपनी तरफ से पूरी तरह से ऐहतियात बरतते हैं।
ये है धोखाधड़ी के चौकाने वाले मामले
गंगानगर थाना इंचौली जिला मेरठ उत्तर प्रदेश निवासी मुकेश कुमार ने मेरठ के ही कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर पंजाब नेशनल बैंक गोविंदपुरम शाखा गाजियाबाद से नरेंद्र डोगरा के नाम से दो फर्जी चेक बनाकर उनके खाते से 11 लाख और चंद्रकांता के पीएनबी शाखा गुजरांवाला टाउन दिल्ली के खाते से पांच फर्जी चेकों से 45 लाख 20 हजार रुपए अपने पीएनबी पलटन बाजार देहरादून के चालू खाते में जमा कराए।
इसके बाद आरोपी ने 11 चेकों और एटीएम कार्ड से 41 लाख 65 हजार रुपए निकाल लिए। नौ सितंबर 2014 को सीबीसीआईडी ने पूरे प्रकरण की रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की।
टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन (टीएचडीसी) ऋषिकेश के खाते से इंदौर और दिल्ली निवासी कुछ लोगों ने बैंक अधिकारियों से मिलीभगत कर नौ करोड़ 27 लाख 51 हजार 47 रुपए फर्जी चेकों से अपने खाते में हस्तांतरित कराए। इसके बाद रकम निकाल ली गई।
टीएचडीसी अधिकारियों की शिकायत के बाद सीबीआई निर्मल सिंह निवासी तरणताल पंजाब, मनोहर लाल निवासी मालवीय नगर नई दिल्ली (पीएनबी ब्रांच मैनेजर), विष्णु परिहार निवासी इंदौर आदि को गिरफ्तार कर चुकी है। कुछ आरोपी जेल में हैं। सीबीआई की चार्जशीट के बाद कोर्ट ने इसी महीने 12 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए हैं।
ऐसे होता है पूरा खेल
जालसाज ऐसे खातों की तलाश में रहते हैं, जिनमें मोटी रकम जमा हो। इस पर भी उन खातों पर फोकस किया जाता है, जिनमें लंबे समय से कोई ट्रांजेक्शन नहीं हुई हो। बैंक कर्मचारियों से मिलीभगत कर ठग संबंधित व्यक्ति या संस्थान का खाता नंबर हासिल करते हैं।
इसके बाद कुछ मशक्कत कर किसी काम के भुगतान के एवज में उस व्यक्ति या संस्थान से मामूली रकम का चेक ले लेते हैं। इसके लिए ये गिरोह संबंधित व्यक्ति या संस्थान में पहले काम कर चुके लोगों को भी अपने साथ मिला लेते हैं।
इस चेक का क्लोन तैयार कर रकम पाने वाले व्यक्ति का नाम और राशि बदल ली जाती है। चूंकि चेक का नंबर और हस्ताक्षर प्रामाणिक होते हैं, रकम गिरोह के खाते में बैंक ट्रांसफर कर देता है।
ये बरतें सावधानी
- खाताधारक अपने खातों को नियमित रूप से चेक करें
- बैंक आकर पासबुक में हर माह एंट्री जरूर कराएं
- किसी भी व्यक्ति को अपना खाता नंबर न बताएं
- अपनी चेकबुक और खाता संबंधी जानकारियां गोपनीय रखें
- चेक देने में सावधानी बरतें, अनजान लोगों को चेक देने से बचें
- कौन सा चेक किसे दिया है, ध्यान रखें, रिकार्ड बनाएं
(पंजाब नेशनल बैंक के सहायक महाप्रबंधक नरेश कुमार ने बताया)