फर्जीवाड़ा करने वाले कुछ लोग मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से भी रकम हड़पने की कोशिश से बाज नहीं आ रहे। गरीब बालिकाओं की शादी, असमर्थ के इलाज के कुछ आवेदनों के सत्यापन में यह सच्चाई सामने आई है। इस पर उत्तराखंड मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऐसे कुछ दलालों की तस्वीरें मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष यूनिट में चस्पा करवाकर उनकी एंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया है।
ऐसे मामले संज्ञान में आने पर मुख्यमंत्री ने हिदायत दी है कि विवेकाधीन कोष से पैसा जारी किए जाने से जुड़े प्रत्येक मामले में टेलीफोन के साथ-साथ भौतिक सत्यापन करने की व्यवस्था भी अमल में लाई जा रही है। सीएम की तरफ से यह निर्देश भी दिए हैं कि यदि अब फर्जीवाड़ा पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री के विवेकाधीन कोष से आर्थिक रूप से पिछड़े नागरिकों को बीमारियों के इलाज, दुर्घटना में मौत, बेटियों की शादी, गरीब छात्रों की पढ़ाई आदि के लिए मदद का प्रावधान है। मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों की मानें तो इस राहत राशि के लिए कुछ लोगों ने फर्जीवाड़ा शुरू कर दिया। एक छुटभैया नेता बीते दिनों अपने साथ एक परिवार को लेकर मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस पहुंचा।
उसने बताया कि परिवार बेहद निर्धन है और बेटी की शादी होनी है। इसके लिए उसने आर्थिक मदद किए जाने की गुहार लगाई। वह अपने साथ शादी का कार्ड भी लाया। विवेकाधीन कोष से पैसा जारी किए जाने के लिए उसने एक आवेदन किया और साथ में कार्ड की एक कॉपी संलग्न की। शक होने पर विवेकाधीन कोष के प्रभारी ने कार्ड पर दिए नंबरों पर फोन करके शादी की बधाई दी, तो मामला फर्जी निकला।
शहर के एक प्रमुख अस्पताल में एक बीमार व्यक्ति का उपचार हुआ, जिसमें 11 हजार रुपए का खर्च आया। आर्थिक रूप से निर्धन इस व्यक्ति के पास अस्पताल में ही कार्यरत एक एजेंट पहुंचा, जिसने उसे मुख्यमंत्री के विवेकाधीन कोष से मदद करने की बात समझाई। वह तैयार हो गया। एजेंट ने इस बिल को 11 हजार से बढ़ाकर सीधे एक लाख दस हजार कर दिया। तय हुआ था कि उपचार के खर्च के अलावा जो अतिरिक्त पैसा उसे मिलेगा, उसे दलाल खुद रखेगा।
मुख्यमंत्री के विवेक पर जारी होता है पैसा
विवेकाधीन कोष पूरी तरह मुख्यमंत्री के अधीन होता है। इसमें मुख्य रूप से निर्धन परिवारों को विभिन्न प्रकार से सहायता की जाती है। बीमारियों के उपचार के अलावा गरीब बालिकाओं की शादी, आकस्मिक दुर्घटना में मृत्यु होने, गरीब छात्रों की पढ़ाई के लिए, विधवाओं, दैवीय आपदा, अग्निकांड आदि से जुड़े मामलों पर विचार के बाद धन जारी किया जाता है। वर्ष 2014 में विवेकाधीन कोष के तहत मिलने वाली सहायता का दायरा बढ़ाने पर भी कैबिनेट की सहमति बनी थी। इसके तहत अधिकांश दरों में दोगुना से अधिक वृद्धि की गई थी।
इस फैसले के बाद असहाय दुर्बल वर्ग के व्यक्तियों, निराश्रित व विधवाओं को पांच हजार के स्थान पर दस हजार व बीमारों को पांच हजार के स्थान पर बीमारी की गंभीरता के हिसाब से एक लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता दिए जाने की बात तय हुई थी। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष नियमावली में किए गए संशोधन के हिसाब से समाजिक व सांस्कृतिक कार्य करने वाले संगठनों को पांच हजार के स्थान पर पचास हजार, जघन्य हत्या, अपराध व दुर्घटना में कमाऊ सदस्य की मृत्यु होने पर 20 हजार रुपए की जगह 50 हजार रुपए की सहायता का प्रावधान किया गया था।
दैवीय आपदा, अग्निकांड आदि में पीड़ित लोगों को 35 हजार रुपए के स्थान पर 50 हजार रुपए, निर्धन बीपीएल में आच्छादित छात्रों को व्यवसायिक कोर्स के लिए 15 हजार के स्थान पर 40 हजार रुपए, इसी वर्ग के छात्रों को विदेश यात्रा के लिए 40 हजार के स्थान पर 50 हजार रुपए, बीपीएल परिवार के लोगों की पुत्री की शादी के लिए 20 हजार के स्थान पर 25 हजार रुपए दिए जाते हैं, बशर्ते उन्होंने समाज कल्याण की किसी और अन्य योजना से यह सहायता न ली हो।
विवेकाधीन कोष में कुछ आवेदकों ने गलत तथ्यों के आधार पर पैसा लेने का प्रयास किया था, जिन्हें समय रहते पकड़ लिया गया। ऐसे लोगों को चिन्हित करके उनकी एंट्री प्रतिबंधित की गई है। यह निर्देश भी दिए गए हैं कि आवेदन का सत्यापन करके ही प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री