कथित महिला नशा तस्कर की गिरफ्तारी के मामले में दून पुलिस की किरकिरी हुई है। पुलिस ने न्यायालय से इसकी न्यायिक रिमांड मांगी थी, लेकिन न्यायालय ने उसे बरी कर दिया। पता चला कि महिला ने खुद को फंसाने की शिकायत की थी। न्यायालय ने प्रशिक्षु डीएसपी और गिरफ्तारी करने वाले एसआई समेत चार पुलिसकर्मियों के मोबाइल जब्त कर जांच के आदेश दिए हैं।
दरअसल, कैंट पुलिस ने 18 सितंबर को एक महिला को 240 ग्राम चरस के साथ गिरफ्तार करने का दावा किया था। महिला लीची के बाग में खड़ी थी। तलाशी पर उससे थैले में 240 ग्राम चरस बरामद की। सब इंस्पेक्टर ताजबर सिंह नेगी, कांस्टेबल सचिन और महिला कांस्टेबल संगीता आर्य ने यह कार्रवाई की। चूंकि, गिरफ्तारी के वक्त राजपत्रित अधिकारी का होना आवश्यक है तो ताजबर ने फोन कर ट्रेनी डीएसपी अनुषा बडोला को बुला लिया और आरोपी महिला को गिरफ्तार किया।
इसी आधार पर पुलिस ने शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस की कोर्ट में आरोपी की न्यायिक अभिरक्षा के लिए प्रार्थनापत्र दिया। लेकिन, जब न्यायालय ने बचाव पक्ष का जवाब सुना तो पुलिस की पोल खुल गई। अधिवक्ता सौरभ दुसेजा ने बताया कि महिला और उसकी मां ने कई बार पुलिस को शिकायत की कि उसके रिश्तेदार नशे के धंधे में संलिप्त हैं। वह कई बार उन्हें फंसाने की धमकी दे चुके हैं। इस आधार पर उन्होंने 29 सितंबर 2018, 27 अगस्त 2019 और नौ सितंबर 2019 को एसपी सिटी और एसएसपी को भेजे शिकायती पत्रों की प्रतियां दिखाई। बचाव पक्ष की दलील सुनने के बाद न्यायालय ने इस गिरफ्तारी को संदेहास्पद बताया। संदेह है कि पुलिस दूसरे पक्ष से मिल कर महिला को गिरफ्तार किया। न्यायालय ने चारों पुलिसकर्मियों के मोबाइल जब्त कर जांच के आदेश एसएसपी को दिए हैं।
न्यायालय के आदेशों का पालन किया जाएगा। यदि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कोई साक्ष्य मिलते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-अरुण मोहन जोशी, एसएसपी