जबकि ऊधमसिंह नगर जनपद में चार कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। सभी संक्रमित मरीज बाहरी राज्यों से वापस आए थे। पंतनगर में क्वारंटीन किए गए अल्मोड़ा निवासी 38 वर्षीय युवक हरियाणा से आया था।
वहीं, खटीमा निवासी 27 वर्षीय युवक गुजरात से आया था। गदरपुर निवासी 23 वर्षीय युवक पीलीभीत और 35 वर्षीय संक्रमित मरीज दिल्ली से आया था। इन सभी को क्वारंटीन में रखा गया था। कोरोना के लक्षण दिखाने देने पर सैंपल जांच के लिए भेजे गए।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार शनिवार को पूरे प्रदेश से 233 सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। जबकि 280 सैंपलों की जांच रिपोर्ट आनी बाकी है।
नैनीताल जनपद में एक संक्रमित मरीज की दूसरी सैंपल रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया। इसे मिलाकर प्रदेश में 46 मरीज ठीक हो चुके हैं। 21 संक्रमित मरीज ही इलाज के लिए भर्ती हैं।
चार मई के बाद ऑरेंज और ग्रीन जोन में आर्थिक गतिविधियों की छूट देने के बाद प्रदेश में करोना संक्रमित छह मामले सामने आए हैं।
इसमें पांच मामले ऊधमसिंह नगर और एक मामला देहरादून जनपद के एम्स ऋषिकेश में मिला है।
गुरुग्राम से हरिद्वार पहुंचे चमोली जिले के 570 लोगों को जिला प्रशासन ने बसों से उनके घर भिजवा दिया। दो दिन पहले इन लोगों को हरियाणा से यहां लाया गया था। मालूम हो कि गुरुग्राम और चंडीगढ़ में फंसे लोगों को घर लाने के लिए प्रदेश सरकार ने बड़ी संख्या में रोडवेज की बसों को वहां भेजा था।
शुक्रवार को ही काफी संख्या में गढ़वाल के विभिन्न जिलों के युवा यहां पहुंचे थे, जिसमें से कुछ को उसी दिन भेज दिया गया। चमोली के लोगों को प्रेमनगर आश्रम में रोका गया था। आश्रम के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने सभी लोगों की खाने-पीने की व्यवस्था आश्रम के प्रबंधक और रमणीक भाई की देखरेख में करवाई थी।
शनिवार सुबह को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद एसडीएम कुसुम चौहान, एआरटीओ मनीष तिवारी और जिला उद्यान अधिकारी नरेंद्र यादव आदि अधिकारियों की देखरेख में इन सभी को बसों के जरिये भेजने का कार्य शुरू किया गया। भाजपा के जिला महामंत्री विकास तिवारी और जिला प्रवक्ता लव शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर बसों को रवाना कराया।
एसडीएम कुसुम चौहान ने बताया कि सभी लोगों को रास्ते के लिए भोजन और पानी भी उपलब्ध कराया गया है। एआरटीओ मनीष तिवारी के अनुसार सभी लोगों के लिए बसों की समुचित व्यवस्था कर उन्हें चमोली तक भिजवाने का प्रबंध किया गया है। वहां के जिला प्रशासन को भी इस बारे में सूचना दे दी गई है।
कोरोना संक्रमण रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन के चलते जहां सरकारी मशीनरी संबंधित कार्यों में व्यस्त है, वहीं अतिक्रमणकारी चोरी छिपे वरुणावत की तलहटी खोद कर अवैध सड़क तैयार करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
भूस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील इस क्षेत्र में सड़क खोदे जाने से यहां निचले हिस्से में बने भवनों पर खतरा मंडराने लगा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अवैध सड़क निर्माण कार्य बंद कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
बता दें कि वर्ष 2003 में उत्तरकाशी नगर में वरुणावत भूस्खलन से भारी तबाही के बाद वरुणावत की तलहटी को बफर जोन घोषित कर यहां किसी भी तरह के निर्माण प्रतिबंधित कर दिए गए थे। वरुणावत के मस्जिद मुहल्ले वाले छोर से नीचे आबाद बस्ती और कलक्ट्रेट तक भूस्खलन का मलबा न पहुंचे इसके लिए लोहे के गार्डरों की विशाल दीवार बनायी गई थी।
हैरानी की बात है कि आजकल लॉक डाउन की आड़ में इस दीवार को खोद कर यहां सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। पालिका क्षेत्र में बन रही इस सड़क को लेकर पालिका प्रशासन ने अपना पल्ला झाड़ लिया है। जिससे अतिक्रमणकारियों के हौंसले बुलंद हैं।
नगर पालिका की ओर से मस्जिद मुहल्ला क्षेत्र में किसी सड़क का निर्माण नहीं कराया जा रहा है। यदि वहां कोई सड़क बना रहा है तो वह पूरी तरह अवैध है। इसकी पड़ताल कराकर सड़क निर्माण कराने वालों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करायी जाएगी।
- सुशील कुरील, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका बाड़ाहाट उत्तरकाशी