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काश्मीर आपदाः हरिद्वार के चार युवक अभी भी लापता

Thu, 11 Sep 2014 09:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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कश्मीर में आई बाढ़ में फंसे नगर के सात युवकों में से तीन के सही सलामत होने की खबर मिलने पर परिजनों ने राहत की सांस ली है, लेकिन अभी चार लोगों का पता नहीं चल पाया है। परिजन उनकी सलामती के लिए दुआएं कर रहे हैं।
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नगर के मोहल्ला पीरगढ़ी के सात युवक कश्मीर के श्रीनगर में लकड़ी की नक्काशी का काम करते हैं। वहां आई बाढ़ में ये युवक फंस गए थे। छह सितंबर के बाद से इनकी परिजनों से बात नहीं हुई थी तब से परिजन इनकी सलामती के लिए दुआएं कर रहे थे।

इसी बीच बुधवार को श्रीनगर से सेना के एक जवान ने इनके घर फोन कर बताया कि तसलीम, अबरार और शमीम को बचा लिया गया है। इन्हें सेना के कैंप में रखा गया है जबकि शाहनवाज, जुल्फकार, इरशाद व नदीम का अभी पता नहीं चल पाया है।
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बचाए गए युवकों ने बताया है कि ये चारों दूसरी जगह पर गए हुए थे। इसलिए इनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। बचाए गए वसीम का भाई नदीम तथा अबरार का भाई जुल्फकार अभी लापता हैं।
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छह दिन बाद आई खबर बेटा सुरक्षित है

लक्सर। बेटे से छह दिन से संपर्क कटा हुआ था। उसकी सलामती को लेकर जान सांसत में थी। उसके सही सलामत होने की खबर मिली तो जान में जान आयी। यह कहना ढाढे की गांव निवासी और वरिष्ठ अधिवक्ता जयपाल सिंह और उनकी पत्नी शशी देवी का। इनका बेटा मुकुल चौधरी सीआरपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट है और जम्मू में तैनात है।

जयपाल के अनुसार, पांच सितंबर को मुकुल ने बताया था कि उनकी यूनिट झेलम नदी वाले इलाके में है। यहां बाढ़ का पानी आ गया है। वह व उनके अन्य अधिकारी सामान बांधकर सुरक्षित ठिकाने पर शिफ्ट होने की तैयारी कर रहे हैं।

इसके बाद से उनकी मुकुल से बात नहीं हो पाई। उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ आ रहा है। जयपाल ने बताया कि बृहस्पतिवार को उनके विभाग के एक कर्मचारी द्वारा जानकारी दी गई कि मुकुल सुरक्षित है और यूनिट के साथ बाढ़ राहत कार्यों में लगे हुए हैं। बेटे की सलामती की खबर सुनने के बाद परिवार के लोगों की जान में जान आई।
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पहाड़ी पर फंसे लोगों को एयरपोर्ट पहुंचाया

लक्सर। डल झील के सामने होटल चलाने वाले लक्सर निवासी पुत्तन भाई के दामाद सलाउद्दीन और चाचा हाजी अमीर सहित आठ लोगों को सेना ने सुरक्षित एयरपोर्ट पर पहुंचा दिया हैं। ये लोग कई दिनों से एक पहाड़ी पर शरण लिए हुए थे।

एयरपोर्ट पहुंचने के बाद इन सभी ने अपने परिजनों से बातचीत कर अपना हालचाल बताया है। इसके अलावा डल झील के निकट चाय की दुकान चलाने वाले लक्सर के मेन बाजार निवासी शमीम भूरा को भी सेना के जवानों ने निकालकर सुरक्षित उसके रिश्तेदारों के यहां पहुंचा दिया है।

यह जानकारी भूरा ने लक्सर स्थित अपने परिजनों को फोन पर दी। वहीं इसी पहाड़ी पर शरण लिए हुए अन्य लोगों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
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