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उत्तराखंड विधानसभा में पारित हुए चार महत्वपूर्ण विधेयक

Thu, 17 Mar 2016 02:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून

सार

  • चकबंदी विधेयक को भी बुधवार को सदन के पटल पर रखा।
  • आनलाइन शॉपिंग पर प्रदेश सरकार ने टैक्स लगाने की व्यवस्था।
  • ई-कामर्स भी कर के दायरे में।
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हरीश रावत - फोटो : AmarUjala
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विस्तार
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बुधवार को सदन में चार विधेयकों ने अधिनियमों की शक्ल ले ली। आनलाइन शॉपिंग पर टैक्स लगाने के प्रस्ताव को सदन से मंजूरी मिल गई। इसी तरह भूगर्भ जल (विकास एवं प्रबंधन का विनियमन एवं नियंत्रण) विधेयक , 2016 को भी पारित कर लिया गया।
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उत्तराखंड परिवहन और नागरिक अवस्थापना उपकर संशोधन विधेयक और उत्तराखंड कृषि उत्पाद मंडी विकास एवं विनियमन अधिनियम 2011 का संशोधन विधेयक भी सदन से पारित हुआ। चकबंदी विधेयक को भी बुधवार को सदन के पटल पर रखा गया।

आनलाइन शॉपिंग पर प्रदेश सरकार ने टैक्स लगाने की व्यवस्था की है। प्रदेश सरकार ने इस विधेयक को प्रवेश कर के संशोधन के रूप में पेश किया। यही कारण रहा कि इसे एक संशोधन विधेयक के रूप में पेश किया गया। प्रदेश में माल के स्थानीय क्षेत्रों में प्रवेश पर टैक्स का अधिनियम 2008 से ही लागू है।
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अब इसमें संशोधन कर ई-कामर्स को भी कर के दायरे में लाया गया है। वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश ने संशोधन विधेयक को सदन में प्रस्ताव रखा। हालांकि, प्रदेश में आनलाइन शॉपिंग पर प्रदेश सरकार पूर्व में मंत्रिमंडल में लाए गए प्रस्ताव के जरिये पहले ही टैक्स लगा चुकी है। इस पर दस प्रतिशत का टैक्स लिया जा रहा है।

सदन में भूगर्भ जल विधेयक, 2016 को मंजूरी

हरीश रावत - फोटो : AmarUjala
भूगर्भ जल के दोहन से संबंधित नया विधेयक भी बुधवार को सदन में ध्वनिमत से पारित हुआ। पेयजल मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने विधेयक को सदन के पटल पर रखा। नैथानी ने कहा कि भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन को देखते हुए यह विधेयक लाया गया है।

विधेयक में केवल भूगर्भ जल के व्यवसायिक उपयोग को टैक्स के दायरे में लाया गया है। इसके तहत प्रदेश सरकार प्राधिकरण का गठन करेगी। किसी भी स्थान पर कुंआ खोदने के लिए प्राधिकरण से अनुमति जरूरी होगी। हैंडपंप और सामान्य कुओं को इस अनुमति के दायरे से बाहर रखा गया है।

विपक्ष की ओर से मदन कौशिक ने इस विधेयक को प्रवर समिति को सौंपने का प्रस्ताव किया। कौशिक ने कहा कि इस विधेयक में प्राधिकरण को असीमित अधिकार दिए गए है, जिनका दुरुपयोग होने की आशंका है। भाजपा विधायक हरभजन सिंह चीमा ने इसे काला कानून करार दिया। ध्वनिमत से यह विधेयक पारित कर दिया गया।
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हंगामे के चलते अधिकतर विधेयक बिना चर्चा के पारित

हरीश रावत - फोटो : file photo
उत्तराखंड परिवहन एवं नागरिक अवस्थापना उपकर संशोधन विधेयक, 2016 भी सदन में पारित हुआ। इस विधेयक को वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश ने सदन के पटल पर रखा। इस विधेयक के जरिये सरकार ने प्रदेश में बाहर से आने वाले वाहनों पर उपकर लगाने की व्यवस्था की है।

सदन में हंगामे के चलते विपक्ष का इस विधेयक पर संशोधन प्रस्ताव नहीं आ पाया। इसी तरह उत्तराखंड कृषि उत्पाद मंडी विकास एवं विनियमन संशोधन विधेयक भी सदन में बिना किसी चर्चा के पारित हो गया।

मंडी परिषद को सरकार ने शराब कारोबार की नोडल एजेंसी बना दिया था। मंडी एक्ट में मंडी को कृषि उत्पादों से इतर कोई और कारोबार करने की इजाजत नहीं है। इस विधेयक के जरिये सरकार ने मंडी को कृषि उत्पादों के अतिरिक्त वस्तुओं का कारोबार करने देने की व्यवस्था की है। लंबे इंतजार के बाद बुधवार को सरकार ने सदन के पटल पर उत्तराखंड पर्वतीय क्षेत्रों के लिए जोत चकबंदी विधेयक को भी सदन के पटल पर रखा। कृषि मंत्री हरक सिंह ने इसका प्रस्ताव किया।
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