I
Iतरुण विजय ने मंदिर को संरक्षित करने की उठाई मांगI
पूर्व सांसद एवं राष्ट्रीय संस्मारक प्राधिकरण भारत सरकार के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष तरुण विजय के नेतृत्व में पुरातत्व विशेषज्ञों की टीम ने सहसपुर विकासखंड के झाझरा गांव में स्थित प्राचीन नागर शैली के मंदिर के अवशेषों का निरीक्षण किया। यहां उत्कीर्ण स्तम्भ, आमलक, महिषासुर मर्दिनी का कृष्ण वर्णी ग्रेनाइट में अंकित मूर्ति, प्राचीन मृदभांड खंड एवं शिलाखंड मिले हैं। जिससे यह संभावना जताई जा रही है कि इनका प्रयोग मंदिर निर्माण में किया गया होगा।
पुरातत्व विशेषज्ञों का कहना है कि प्रथम दृष्ट्या ये अवशेष 15-16वीं शताब्दी के मंदिर के प्रतीत होते हैं। व्यापक परीक्षण और उत्खनन के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पूर्व सांसद ने केंद्रीय संस्कृति मंत्री और सूबे के मुख्यमंत्री से मंदिर के अवशेषों को संरक्षित करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि पुरानी धरोहर उपेक्षा और लापरवाही का शिकार होती आ रही हैं। उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है, लेकिन देवताओं के प्राचीन अवशेष जो, यहां मिले हैं उन पर ध्यान देना जरूरी है। विकासनगर तहसील के राजावाला-बाढ़वाला में स्थित जगत ग्राम अश्वमेध स्थल को जाने के लिए मार्ग नहीं है।
उन्होंने कहा कि देहरादून में भी भद्रकाली माता मंदिर के प्राचीन पुरातात्विक अवशेष बिखरे मिले हैं। यहां प्राचीनकाल में नियमित पूजा-अर्चना होती थी। इस मौके पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीक्षक सर्वेक्षक मनोज सक्सेना और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।