उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा अब प्रदेश की सियासी पिच पर जमकर बैटिंग करने का मन बना चुके हैं।
अभी तक दिल्ली और दून के बीच शटल बने पूर्व मुख्यमंत्री ने अब जनवरी से उत्तराखंड में डेरा जमाने का मन बनाया है। बहुगुणा अपने पहले दौरे में भी कैबिनेट बदलने का शिगूफा छेड़ कर मुख्यमंत्री हरीश रावत की मुश्किल बढ़ा चुके हैं।
2012 में मुख्यमंत्री पद की रेस में जब विजय बहुगुणा आगे आए तो बहुगुणा कैंप के विधायकों की अपेक्षाएं बढ़ गईं। पर बाद में हालात इस कदर बदले कि कुर्सी बहुगुणा के हाथ से फिसल कर हरीश रावत के पास चली गई। ऐसे में हरीश रावत से अंदरखाने बहुगुणा कैंप के विधायक खुश नहीं हैं।
खुद विजय बहुगुणा गाहे-बगाहे हरीश रावत के लिए मुश्किल खड़ी करने से नहीं चूकते। पिछले कुछ समय से बहुगुणा कैंप खाली पड़े मंत्री पद को लेकर दबाव बनाए हुए था, पर चुनाव की तैयारी शुरू होते ही समीकरण बदल गए। अब मंत्रियों और विधायकों की प्राथमिकता उनके निर्वाचन क्षेत्र हैं, मामला चुनाव में टिकटों का भी है।
इन सारी स्थितियों के बीच आ रहीं खबरों के मुताबिक बहुगुणा जनवरी के पहले पखवाड़े से ही दून और सितारगंज को भरपूर समय देने का मन बना चुके हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि सितारगंज की बागडोर फिलहाल बहुगुणा के बेटे सौरभ के हाथ में है। सौरभ की सक्रियता भी वहां बहुत है।
बहुगुणा खुद भी सितारगंज की उपेक्षा की शिकायत कर रहे हैं। ऐसे में बहुगुणा सितारगंज को लेकर ही मुख्यमंत्री हरीश रावत को निशाना बना सकते हैं। इससे इतर बहुगुणा ने मंत्रिमंडल में बदलाव का मुद्दा भी उठाया हुआ है। मंत्रिमंडल में बदलाव इस समय हरीश रावत के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
यह मामला छेड़ते ही कांग्रेस में उठापटक का दौर शुरू हो सकता है। वहीं, यह भी माना जा रहा है कि दिसंबर अंत में हरीश रावत ऑपरेशन मंत्रिमंडल को भी अंजाम दे सकते हैं। ऐसे में नए साल में बहुगुणा के पास सियासी दंगल के लिए कई दांव भी होंगे।