अल्मोड़ा जिलाध्यक्ष पर फैसला बदले जाने के बाद भले ही गोविंद सिंह कुंजवाल अब इस मामले को खत्म बता रहे हैं, लेकिन उन्होंने प्रभारी को जो इस्तीफा भेजा था, उसमें भी वह ‘अपनों’ पर हमलावर हुए थे। 11 अगस्त को पार्टी प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह को भेजे त्यागपत्र में उन्होंने सत्ता संग्राम का जिक्र करते हुए कई बातें लिखी हैं। उन्होंने लिखा था-मैंने निष्पक्ष तरीके से उत्तराखंड के हितों तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को ध्यान में रखकर एक संवैधानिक निर्णय लिया था। इसके बाद उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय ने भी उस निर्णय को सही ठहराया। उस समय भी प्रदेश के कुछ कांग्रेस के नेता यह नहीं चाह रहे थे कि मैं इस प्रकार का सही संवैधानिक निर्णय करूं।
प्रदेश भाजपा ने पूर्व स्पीकर और कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल को चुनौती दी कि वह बताएं कि उन्हें 100 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री पद का ऑफर किसने दिया। अन्यथा वह भाजपा और प्रदेश के लोगों से माफी मांगे। पार्टी ने कुंजवाल पर अपने तंज में कहा कि वह धमाका करने की कोशिश में खुद ही धराशायी हो गए हैं। अब वह कांग्रेस में छिड़े गृहयुद्ध में अपनी गिरती साख बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
विगत दिवस कुंजवाल ने बयान दिया था कि कांग्रेस सरकार के समय पार्टी से अलग हुए विधायकों की सदस्यता बहाल रखने के लिए उन्हें 100 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री के पद का ऑफर दिया गया था। उनके इस बयान पर भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रमुख डॉ. देवेंद्र भसीन ने कहा कि पार्टी इस आरोप का पूरी तरह से खंडन करती है। भाजपा कुंजवाल को चुनौती देती है कि वे बताएं कि उन्हें यह ऑफर किसने दिया। यदि वे यह नहीं बताते हैं तो उन्हें प्रदेश की जनता और भाजपा से माफी मांगनी चाहिए। भसीन ने कहा कि कुंजवाल इस तरह का आरोप लगा कर फिर से दिक्कत में आ गए हैं । क्योंकि कुंजवाल की स्पीकर के रूप में भूमिका विवादास्पद रही व उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में उनका बयान हास्यास्पद बन गया है । भाजपा का उनसे यह भी सवाल है कि दो साल बाद वे अब क्यों बोल रहे है?
भसीन ने कहा कि सच यह है कि कांग्रेस के अंदर गृह युद्ध चल रहा है। इसी के चलते कुंजवाल ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पर दबाव बनाने के लिए यह धमकी तक दे डाली वे विधायकी से त्यागपत्र दे देंगे। बाद में कुंजवाल अपने ही बयान में फंस गए और अब भाजपा पर आधारहीन आरोप लगाकर बचने की कोशिश कर रहे हैं । डॉ. भसीन ने कहा कि प्रदेश की जनता पहले ही कांग्रेस को नकार चुकी है और अब कांग्रेस का यह गृह युद्ध पार्टी को उत्तराखंड में पूरी तरह से डुबा देगा।