केसी नंदा करिअप्पा ने बताया कि वर्ष 1965 युद्ध के दौरान उन्हें कई अन्य भारतीय सैनिकों के साथ कैद कर लिया गया था। तब पाकिस्तान का पूरा जोर भारतीय सैनिकों को आपस में बांटने पर था।
यहां तक कि कई बार वह सिख रेजीमेंट के सैन्य अफसरों व सैनिकों को भारत के खिलाफ लड़ाई के लिए भी उकसाते। वह उन्हें खालिस्तान मूवमेंट में शामिल होने को कहते। हालांकि किसी भी भारतीय युद्धबंदी पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।
युद्धोन्माद भड़का रहा मीडिया
पूर्व एयर मार्शल केसी नंदा करिअप्पा ने युद्धोन्माद भड़काने के लिए मीडिया को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया कई बार गैरजिम्मेदार ढंग से खबरें चलाता है। कई बार अधूरे व गलत तथ्यों पर खबरें चलाई जा रही हैं।