देहरादून। समाज कल्याण विभाग की ओर से मेधावी छात्रों के लिए निशुल्क सिविल सर्विसेज कोचिंग योजना शुरू तो कर दी गई, लेकिन विभाग अपने ही हॉस्टल के मेधावी छात्रों को योजना से जोड़ना भूल गया। यही वजह रही कि कोचिंग की जानकारी न होने के कारण हॉस्टल का एक भी छात्र आवेदन नहीं कर सका।
दरअसल, समाज कल्याण विभाग द्वारा सिविल सर्विसेज कोचिंग योजना के तहत जिले में चार कोचिंग सेंटर शुरू किए गए हैं। इनमें एससी-एसटी वर्ग के जरूरतमंद मेधावी छात्रों को छह महीने की निशुल्क कोचिंग देने का प्रावधान है। योजना शुरू हुई तो विभाग ने कॉलेजों में खूब प्रचार-प्रसार किया, लेकिन यह भूल गया कि उसके ही हॉस्टल में कई मेधावी एवं जरूरतमंद छात्र रहते हैं जो इस योजना का लाभ लेने के इच्छुक हैं। विभाग इन छात्रों को निशुल्क रहने की सुविधा तो दे रहा है, लेकिन जब इनके भविष्य को सही दिशा देने का मौका था तब वह इसे भुना नहीं सका।
कई छात्र रहते हैं गैरहाजिर
विभाग ने तीन कोचिंग सेंटर देहरादून व एक सेंटर डोईवाला में शुरू किया है। इनमें करीब पांच फीसद छात्रों की अनुपस्थिति दर्ज भी की जा रही है। अच्छा होता कि योजना में वास्तविक जरूरतमंद छात्रों को जोड़ा जाता, ताकि वह कोचिंग का लाभ लेकर अपना भविष्य बना पाते।
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विभाग की सिविल सर्विसेज कोचिंग योजना का लाभ सरकारी हॉस्टल के छात्रों को भी पहुंचाया जाएगा। इसके लिए विभागीय स्तर पर विचार चल रहा है।
-हेमलता पांडेय, जिला समाज कल्याण अधिकारी