मेडिकल पीजी कोर्स में दाखिले की दलाली में पुलिस के चेहरे पर कालिख पुत गई। एसपी देहात के बाद बुधवार को एसओजी प्रभारी रवींद्र यादव और नेहरू कॉलोनी के एक सिपाही सुकरमपाल सिंह को निलंबित कर दिया गया। एक दारोगा और 11 पुलिस कर्मियों को जिला बदर करने के आदेश हैं।
एक निजी मेडिकल के पीजी कोर्स में दाखिला दिलाने के नाम पर ठगी करने के मामले में जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की गई है। मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और उन पर कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है। मामले में पहले दिन से ही एसओजी की भूमिका संदिग्ध हो गई थी।
एसओजी दाखिले के दलालों से साठगांठ और पकड़ी गई रकम कम दर्शाए जाने के आरोपों से घिर गई थी। डीजीपी द्वारा गठित एसआईटी की जांच में गंभीर आरोप साबित हुए हैं। मंगलवार देर रात पुलिस अधीक्षक देहात मणिकांत मिश्रा को पुलिस मुख्यालय से अटैच कर दिया गया।
डीआईजी संजय गुंज्याल के गुरुवार को लौटने के बाद उनके स्थानांतरण की आशंका है।
एसओजी प्रभारी समेत दो पुलिस कर्मियों को निलंबित करने के साथ अन्य का स्थानांतरण किया जा रहा है। एसओजी को भंग कर नए सिरे से गठन करने के निर्देश दिए गए हैं।
- बीएस सिद्धू, पुलिस महानिदेशक
यह था मामला
जौलीग्रांट मेडिकल कालेज में पीजी सीट दिलाने के नाम पर ठगी का मामला 27 अप्रैल को पकड़ में आया था। पहले तो पुलिस इसे छिपाती रही, लेकिन मीडिया ने सवाल उठाए तो 29 अप्रैल को चार ठगों की गिरफ्तारी दिखाकर दो लाख रुपए बरामद दिखाए। उस समय रकम ज्यादा होने की बात उठी थी। आरोपों पर डीजीपी बीएस सिद्धू ने आईपीएस सदानंद दाते को जांच सौंपी थी।