देहरादून में विधायक निधि में ग्रामीण सड़कों के नाम पर किस कदर फर्जीवाड़ा हो रहा है यह लोकायुक्त की एक जांच से सामने आया है।
आधा दर्जन अधिकारी इस जांच में दोषी
हाल यह है कि विभिन्न विभागों के करीब आधा दर्जन अधिकारी इस जांच में दोषी पाए गए हैं। अब लोकायुक्त ने शासन से इन अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने को कहा है। मामला प्रताप नगर ब्लॉक का है। विधायक निधि में गांव भेलुंता में सड़क से गांव तक कच्चा रास्ता तैयार किया जाना था।
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इसके लिए तत्कालीन खंड विकास अधिकारी केएस राणा ने मौखिक आदेश जारी किए। आदेश जारी होने केबाद काम भी शुरू कर दिया। 2012 के इस मामले में आचार संहिता के कारण काम रुकवा दिया गया और भुगतान के लिए जोड़ तोड़ शुरू कर दिया गया।
ग्राम विकास अधिकारी ने बाकायदा फरजी मस्टरोल बनाया। प्रभारी खंड विकास अधिकारी ने बिना देखे ही 60 हजार की लागत के इस काम के 30 हजार रुपए जारी करने पर स्वीकृति दी। बाद मे खंड विकास अधिकारी हरी सिंह ने इस पर आपत्ति लगाई तो भुगतान रुक गया।
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लोकायुक्त ने इस बात की जांच कराई तो पता लगा कि तत्कालीन प्रभारी खंड विकास अधिकारी केएस पंवार, अवर अभियंता भारत भूषण भट्ट, सेवा निवृत्त अवर अभियंता एलपी पंत ग्राम पंचायत विकास अधिकारी प्रवीण नौटियाल इस फर्जीवाड़े में शामिल हैं।
लोकायुक्त से की शिकायत
हद तो यह रही कि केएए पंवार ने फर्जी आख्या लोकायुक्त के सामने भी पेश कर दी। ग्राम भेलुंता के मुर्तीराम जोशी ने इस मामले की शिकायत लोकायुक्त से की तब जाकर यह मामला खुलकर सामने आया।
मुर्तीराम जोशी का कहना था कि उन्होंने सड़क बनाई पर उसका पैसा उन्हें नहीं दिया गया। लोकायुक्त ने अब इस मामले में शासन से दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने की संस्तुति की है।
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