देहरादून में हाथी के शिकार करने का मामला सामने आया। हाथी के दांत बिजली के करंट से निकाले गए है। मामले में वन दरोगा और वन रक्षक को निलंबित कर दिया गया है।
तराई पश्चिमी वन प्रभाग के आमपोखरा रेंज में हाथी के शिकार मामले में वन कर्मियों पर गाज गिर गई है। वन मुख्यालय ने प्रथम दृष्टया लापरवाही बरतने पर एक वन दरोगा और वन रक्षक को निलंबित कर दिया है। इसके अलावा पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने का फैसला किया गया है। आगे कई और वन कर्मियों पर कार्रवाई हो सकती है।
27 अक्तूबर को तराई पश्चिम वन प्रभाग की टीम ने एक गुजर को पकड़ा था, उसके पास से हाथी के दांत बरामद हुए थे। जांच की गई तो पता चला कि गुजर और उसके साथी ने बिजली के करंट से हाथी का गिरफ्तारी से दो महीने पहले शिकार कर दांत निकाले थे।
शिकारियों ने हाथी को मारने, दांत निकालने के बाद दफना तक दिया, लेकिन सुरक्षा में लगे वन कर्मियों को भनक तक नहीं लग सकी। इसके बाद डीएफओ ने मामले में लापरवाही बरतने पर वन दरोगा (सेक्सन इंचार्ज) हरी राम और वन रक्षक (बीट इंचार्ज) राजेंद्र सिंह रावत को निलंबित करने की संस्तुति की थी। रिपोर्ट के आधार पर वन मुख्यालय ने दोनों को निलंबित कर दिया है।
घटना के बाद सुरक्षा को और कड़ा किया गया है। लंबी दूरी की गश्त शुरू की गई है। इसके अलावा उच्चाधिकारियों का भी गश्त में जाना सुनिश्चित कराया गया है। लापरवाही बरतने वाले कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. पराग मधुकर धकाते, पश्चिमी वृत्त वन संरक्षक
प्रथम दृष्टया कार्य में लापरवाही बरतने की बात सामने आई है। इस संबंध में प्रभागीय वनाधिकारी की रिपोर्ट और संस्तुति मिली थी। इसका परीक्षण कराने के बाद दोनों वन कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। मामले की विस्तृत जांच कराने का भी फैसला किया गया है। अगर जांच किसी अन्य कर्मी लापरवाही समेत अन्य बात सामने आती हैं, तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
मोनिष मल्लिक, प्रमुख वन संरक्षक (एचआरडी)