‘भारत में वन संक्रमण’ विषय पर भारतीय वन अनुसंधान संस्थान में आयोजित दो-दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन कहा गया कि वन अब सिर्फ सरकार की संपत्ति नहीं है, वनों के अंदर बसी आबादी, वन पंचायतों और वन भूमि के किसानों का अधिकार भी समझने की जरूरत है। वनाधिकारी अपने नजरिये में भी बदलाव लाएं। कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् के महानिदेशक डा. अश्वनी कुमार ने किया।
कार्यशाला में हुई चर्चा
कार्यशाला में महानिदेशक डॉ. कुमार ने भारतीय परिदृश्य में वन संक्रमण काल की स्थिति के संबंध में विस्तार से अधिकारियों को बताया। कार्यशाला में झारखंड, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मिजोरम व नागालैंड के भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
अन्य वक्ताओं ने ताजा स्थिति के मद्देनजर वन कानूनों में परिवर्तन की जरूरत बताई और अधिकारियों से सुझाव भी मांगे।
लोग अब कर रहे वन में खेती-किसानी
उनका कहना था कि वन भूमि में वन पंचायतें बन गई हैं। लोग खेती-किसानी कर रहे हैं। वन क्षेत्र में विकास कार्य हो रहे हैं। भारतीय वन संक्रमण की स्थिति से गुजर रहे हैं।
ऐसे में अधिकारी खुद को स्थिति के मुताबिक ढालें और सब के सहयोग के साथ चलें ताकि वनों और वन्य जीवों को क्षति न पहुंचे। इस मौके पर वन अनुसंधान संस्थान की कार्यवाहक निदेशक डा. नीलू गेरा, वरिष्ठ विज्ञानी डा. ओमवीर सिंह आदि मौजूद रहे।