सरकारी निजाम कैसे चल रहा है, इसका अंदाजा शासन की कार्यप्रणाली से लगाया जा सकता है। सामान्य तौर पर शासन स्तर से आईएफएस जैसे अफसरों के तबादले होते थे, वहां से फारेस्ट गार्ड, वन दरोगा के स्थानांतरण हो रहे हैं। शासन ने 15 वन कर्मियों की ट्रांसफर की लिस्ट जारी की है, इसमें आठ फारेस्ट गार्ड, चार वन दरोगा और तीन डिप्टी रेंजरों का कार्य क्षेत्र बदला गया है।
जंगल की सुरक्षा और प्रबंधन की दृष्टि सबसे छोटी इकाई बीट होती है, जिसकी जिम्मेदारी फारेस्ट गार्ड की होती थी। वन विभाग में फारेस्ट गार्ड की नियुक्ति डीएफओ स्तर से होती थी। डीएफओ ही अपने स्तर से फारेस्ट गार्ड को नियुक्ति करने के साथ तबादले करने से लेकर अनुशासनहीनता होने पर कार्रवाई करता था। इसी तरह वन दरोगा के लिए वन संरक्षक नियुक्ति अधिकारी होता था। उत्तराखंड वन सेवा नियमावली -2016 आने के बाद मुख्य वन संरक्षक (एचआरडी) को फारेस्ट गार्ड का नियुक्ति अधिकारी बना दिया गया।
अब शासन स्तर से ‘नया प्रयोग का चलन’ बढ़ा है। जो शासन डीएफओ और उससे उच्च पदों पर आसीन वन संरक्षक, मुख्य वन संरक्षक, प्रमुख वन संरक्षक जैसे आईएफएस अधिकारियों के तबादले करता था, वह दो बार से फारेस्ट गार्ड के तबादले तक करने लगा है। शासन ने 16 अक्तूबर को शासन स्तर से (सचिव वन) फारेस्ट गार्ड, वन दरोगा और डिप्टी रेंजर का तबादला किया है। यह तबादले स्वेच्छा, पारस्परिक स्वेच्छा और नियंत्रक अधिकारियों संस्तुति के आधार पर किए जाने का उल्लेख आदेश में किया गया है।
रेंजर के तबादले वन मुख्यालय
सामान्य तौर पर रेंजर के तबादले डिवीजन स्तर पर डीएफओ स्तर से होते थे। पर अब वन मुख्यालय स्तर से ही रेंजर के तबादले शुरू किये गए हैं। इसके अलावा वन मुख्यालय स्तर से हुए पहले तबादले और कुछ समय बाद संशोधन तबादला आदेश भी भी खूब किए गए।
भर्ती प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार
वन विभाग में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से 1218 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसे बाद में आयु सीमा और शैक्षिक योग्यता में बदलाव करने की बात कहते हुए स्थगित कर दिया गया। इसके बाद से शासन और नीति नियंता चुप्पी साध कर बैठ गए हैं। जबकि आवेदन शुरू होने के साथ करीब तीस हजार लोगों ने आवेदन कर दिया था। अब यह आवेदक फिर से भर्ती प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।