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उत्तराखंडः शुरू से ही विवादों में रही फारेस्ट गार्ड भर्ती परीक्षा, अब तक दो बार नोटिफिकेशन जारी

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प्रतीकात्मक तस्वीर
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देहरादून। उत्तराखंड में चल रही फॉरेस्ट गार्ड भर्ती परीक्षा शुरू से ही विवादों में रही। अब तक दो बार इस परीक्षा के नोटिफिकेशन जारी हो चुके हैं और कई बार नियम बदल चुके हैं। अब परीक्षा पेपर लीक की वजह से विवादों में है।
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पहला विवाद : केवल साइंस वालों को मौका
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने इस भर्ती का पहला नोटिफिकेशन तीन अगस्त 2017 को जारी किया था। इसके तहत जैसे ही ऑनलाइन आवेदन शुरू हुए तो शैक्षिक योग्यता को लेकर विवाद हो गया। इस भर्ती के लिए केवल वही युवा आवेदन कर सकते थे, जिन्होंने 12वीं की परीक्षा साइंस या एग्रीकल्चर में पास की हो। उत्तराखंड बेरोजगार महासंघ ने इसके खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया। उनका कहना था कि सरकार और आयोग ने आर्ट विषयों से 12वीं पास करने वालों के साथ बेगाना व्यवहार किया है। आखिरकार आयोग को शैक्षिक योग्यता का नियम बदलना 

दूसरा विवाद : हाईकोर्ट ने लगाई रोक
फॉरेस्ट गार्ड भर्ती परीक्षा पर इसी साल जनवरी में हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। दरअसल, वन आरक्षी संघ के अध्यक्ष ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने कहा था कि वन विभाग की भर्ती नियमावली 2016 के तहत नए पदों में से 66 प्रतिशत पद प्रमोशन से भरे जाने चाहिएं और बाकी पद सीधी भर्ती से। जबकि आयोग ने सभी पदों पर सीधी भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। नियमावली में यह भी प्रावधान था कि 10 साल तक संविदा पर सेवाएं देने वालों को 66 प्रतिशत के क्राइटेरिया में जगह दी जाएगी। आखिरकार हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थीं। बाद में रोक हटी तो दोबारा प्रक्रिया शुरू की गई।
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तीसरा विवाद : पेपर लीक
अब परीक्षा का तीसरा विवाद पेपर लीक को लेकर है। आरोप लग रहे हैं कि आयोग ने जो परीक्षा कराई है, उसमें पेपर लीक हुआ है। आयोग हालांकि इससे किनारा कर रहा है, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि अगर पेपर लीक नहीं हुआ तो परीक्षा केंद्र पर मोबाइल कैसे पहुंचा। ओएमआर शीट का फोटो वायरल होना इस बात की तस्दीक करता है कि रोक के बावजूद केंद्र के भीतर मोबाइल पहुंचा था।

दो बार जारी हुआ नोटिफिकेशन
फॉरेस्ट गार्ड भर्ती का नोटिफिकेशन अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने दो बार जारी किया। पहला नोटिफिकेशन 03 अगस्त 2017 को जारी हुआ। इसके बाद दूसरा नोटिफिकेशन 18 सितंबर 2019 को जारी हुआ था।

इन नियमों पर उठे सवाल तो हुआ बदलाव
-भर्ती के लिए साइंस या एग्रीकल्चर से 12वीं पास का नियम बदलकर सभी 12वीं पास के लिए कर दिया गया।
-भर्ती के पहले नोटिफिकेशन में अनिवार्य आयु सीमा 18 से 24 वर्ष रखी गई थी। इस पर विरोध होने के बाद इसे 18 से 28 वर्ष कर दिया गया।
-परीक्षा के तहत पहले यह तय किया गया था कि फिजिकल टेस्ट होगा और इसके बाद लिखित परीक्षा होगी। बाद में यह नियम बदल दिया गया। अब पहले लिखित परीक्षा हुई है, जिसके बाद फिजिकल टेस्ट होगा।
-पहले तय किया गया था कि फिजिकल टेस्ट में पुरुष उम्मीदवार को कंधे पर 10 किलो वजन लेकर 25 किलोमीटर की दौड़ और महिला उम्मीदवार को कंधे पर पांच किलो वजन लेकर 14 किलोमीटर की दौड़ लगानी है। इस पर भी विरोध हो गया। आखिरकार आयोग ने भार उठाने का नियम हटा दिया। अब केवल पुरुष उम्मीदवार को 25 किलोमीटर दौड़ और महिला उम्मीदवार को 14 किलोमीटर दौड़ का नियम ही रह गया है।

छात्र तीन साल से तैयारी कर रहे हैं। प्रदेश में पेपर लीक का ट्रेंड आम सा हो गया है। पेपर लीक होते हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। पहले नोटिफिकेशन में गलतियां और फिर परीक्षा में पेपर लीक, जिसका खामियाजा लाखों युवा उठा रहे हैं। उनकी उम्र निकली जा रही है। नौकरी का सपना चकनाचूर हो रहा है, लेकिन आयोग या सरकार इस मामले को बेहद हल्के में निपटा रही है। पेपर लीक पर दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। जल्द से जल्द दोबारा परीक्षा होनी चाहिए।
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-कमलेश भट्ट, अध्यक्ष, उत्तराखंड बेरोजगार महासंघ
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