उत्तराखंड में जंगलों में व्यापक स्तर पर लगी आग के मामले में हाईकोर्ट में जवाब देते हुए वन विभाग ने कहा है कि जंगलों में लगी आग के 90 फीसदी से अधिक मामलों में आग मानव जनित है। इसमें लापरवाही, दुर्घटना, अज्ञानता या जानबूझकर आग लगाने जैसे कारण शामिल हैं। मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं कपिल जोशी ने स्वयं कोर्ट में उपस्थित हो कर विस्तृत जवाब दाखिल किया।
कपिल जोशी के मुताबिक कुमाऊं क्षेत्र में आग पर पूर्ण रूप से काबू पा लिया गया है। उन्होंने कोर्ट में कहा कि जंगलों की आग को नियंत्रित रखने के लिए विभाग ग्रामीणों की सहभागिता बढ़ा रहा है और वन पंचायतों को आग बुझाने के लिए धनराशि भी उपलब्ध करा रहा है। जोशी ने न्यायालय को बताया कि प्रदेश में 90 प्रतिशत मामलों मे आग मानव जनित थी। उन्होंने न्यायालय को ये भी बताया कि राज्य में पिछले कुछ समय में चार लोगों को जंगल में आग लगाने के आरोप में पकड़ा भी गया है।
कोर्ट ने मामले में प्रमुख वन संरक्षक से तीन सप्ताह में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 25 जून को होगी। मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने बुधवार को मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से गुरुवार दोपहर तक हालात की जानकारी देने को कहा था। मामले में अधिवक्ताओं की ओर से आग पर निगरानी रखने और कारणों की पहचान करने के लिए वाडिया इंस्टीट्यूट, सर्वे ऑफ इंडिया अथवा अन्य विशेषज्ञ एजेंसी की मदद लिए जाने की मांग भी रखी गई।