उत्तराखंड जंगलात में अपर प्रमुख वन संरक्षक इंटेलीजेंस (एपीसीसीएफ) के लेटर बम से खलबली मची है। इन पत्रों में एपीसीसीएफ ने जंगलात की कथित गड़बड़ी और व्यवस्था की पोल खोली थी।
पढ़ें, जब एनडी तिवारी को पिता ने किया बेदखल
लेटर में सिस्टम के निष्क्रिय होने से लेकर प्रमुख वन संरक्षक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया गया था। सूत्रों के अनुसार इसके बाद से जंगलात में अफसरों के बयान की सीमा तय करने की बात कही जा रही है।
मचा है घमासान
जंगलात में उच्च स्तर पर घमासान मचा है। इसके बाद से लेटर लिखने और जवाब देने का दौर शुरू हो गया है। एपीसीसीएफ इंटेलीजेंस एसके दत्ता ने अवैध शिकार और सूचनाओं के संबंध में पिछले साल एक नंवबर, 27 दिसंबर और इस साल 12 फरवरी को प्रमुख वन संरक्षक को पत्र लिखा था।
पढ़ें, संघर्षों का सागर पार कर छुआ अरविंद ने शिखर
इन पत्रों में शिकार की सूचना देने का विवरण, स्थिति अनियंत्रित हो जाने से लेकर पीसीसीएफ की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाया गया था। यह खींचतान विभाग में चर्चा का विषय बनी हुई है।
बयान पर पूछा सवाल
सूत्रों के अनुसार इस संबंध में प्रमुख वन संरक्षक ने एपीसीसीएफ इंटेलीजेंस एसके दत्ता से बयान देने को लेकर सवाल पूछा है। इस संबंध में पत्र भी लिखा गया है।
पढ़ें, ...तो एनडी तिवारी लड़ेंगे सपा से चुनाव!
बयान देने को लेकर अधिकारियों की सीमा तय करने की बात कही जा रही है। इस संबंध में कुमाऊं के उच्चाधिकारियों ने अपने मातहत अधिकारियों को हाल में आगाह भी किया था।
बयान देने संबंधी आदेश लिखा पढ़ी में आया है या फिर मौखिक हुआ है, इसको लेकर कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। इस संबंध में प्रमुख वन संरक्षक एसएस शर्मा से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हुआ।