कॉर्बेट पार्क की शर्मीली समेत तीन घायल बाघिनों ने वन महकमे की नींद उड़ाई है। वन विभाग की तीन टीमों ने घायल बाघिनों को रेस्क्यू करने के लिए ताकत झोंकी हुई है, पर ये बाघिनें तमाम कोशिशों और आधुनिक संसाधनों के बावजूद हत्थे नहीं चढ़ सकी हैं। वन विभाग को चिंता है कि कहीं यह घायल बाघिन मानव-वन्यजीव संघर्ष का बड़ा कारण न बन जाए।
रामनगर की एक आदमखोर बाघिन ने 2016 में वन विभाग की कड़ी परीक्षा ली थी। शिकारी कुत्ते से लेकर हैलीकॉप्टर और तमाम वन कर्मियों को लगाने के बाद भी कई दिनों तक चालाक आदमखोर बाघिन ने खूब छकाया था। अब वन विभाग के सामने एक नहीं बल्कि तीन बाघिनों को काबू करने की चुनौती है। इसमें रामनगर के बिजरानी जोन की शर्मीली नाम से जाने जाने वाली बाघिन है।
वनाधिकारियों के अनुसार पहले भी यह बाघिन सेही के हमले में घायल हुई थी। तब बाघिन को रेस्क्यू कर इलाज कर दिया गया था। अब एक बार फिर यह बाघिन घायल अवस्था में देखी गई। रामनगर वन प्रभाग में भी एक घायल बाघिन है, जिसके आपसी संघर्ष के दौरान मुंह पर चोट लगी है। तराई केंद्रीय समेत वन प्रभाग में भी एक बाघिन घायल है, जिसके पिछले हिस्से में चोट है। तीन बाघिनों को रेस्क्यू कर इलाज करवाने की कोशिश की जा रही है। पशु चिकित्सकों के निर्देशन में टीमों का गठन करने के साथ ही हाथियों से गश्त करने और ड्रोन से मदद लेने का दावा वन महकमा कर रहा है।
वन विभाग तीनों घायल बाघिनों को इलाज के लिए रेस्क्यू करने की कोशिश कर रहा है। तीन वन्यजीवों को ट्रैक्यूलाइज करने के लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने अनुमति प्रदान कर दी है। कैमरा ट्रैप लगाने के साथ बाघिनों का मूवमेंट पता करने के लिए ड्रोन की मदद लेने का फैसला किया गया है। वन कर्मियों को सघन गश्त करने का निर्देश दिया गया है। सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
- डॉ. पराग मधुकर धकाते, पश्चिमी वृत्त वन संरक्षक